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बांझपन समस्या – चिंता कब करनी चाहिए

अगर सभी नहीं तो ज्यादातर शादीशुदा जोड़े शादी के बाद अपना खुद का बच्चा पाने की उम्मीद करते हैं। कई स्त्रियां भोलेपन में यह मान बैठती हैं कि वे पहले ही महीने में गर्भवती हो जाएंगी और वे इसकी कोशिश भी करती हैं तथा गर्भवती नहीं होने पर चिंता में डूब जाती हैं।

इस तरह की चिंता करने से पहले यह याद रखना चाहिए कि पूरी तरह स्वस्थ मां – बाप के लिए माहवारी के एक चक्र में गर्भधारण की संभावना सिर्फ 25% होती है।

समय की बात इसलिए जोड़ी जाती है क्योंकि गर्भनिरोध के उपाय नहीं किए जाने की हालत में गर्भधारण पर किए गए अध्ययनों और अनुमानों से साफ जाहिर होता है कि

  1. पहले महीने में गर्भधारण की संभावना 25% होती है।
  2.  छह महीने में गर्भधारण की संभावना 63% होती है।
  3. नौ महीने में गर्भधारण की संभावना 75% होती है।
  4. एक वर्ष में गर्भधारण की संभावना 80% होती है।
  5. अठारह महीने में गर्भधारण की संभावना 90% होती है।

इस प्रकार यदि युगल ने एक वर्ष के भीतर गर्भ धारण नहीं किया है तब उनकी जांच की जरूरत होती है दूसरी तरफ कुछ जोड़ों को डाक्टरी सलाह में जल्दी करनी चाहिए।

  1. 30 वर्ष से अधिक उम्र के जोड़े
  2. माहवारी नहीं होना या अनियमित होना
  3. गर्भपात का इतिहास
  4. पुरूष जिनके अंडकोष में अंड महसूस नहीं होते हैं।
  5. तनन गड़बड़ी वाले पुरूष

सहायित प्रजनन तकनीक (एआरटी) उन बाधाओं को दूर करती है जो शुक्राणुकोशिका तथा डिम्बाणुकोशिका के मिलने में रूकावट डालती हैं। शुक्राणु तथा डिम्बाणु की व्यवस्था में हुई तरक्की और प्रजनन साइंस की बेहतर समझ के कारण बांझपन का बेहतर इलाज संभव हुआ है। सहायित प्रजनन तकनीक में वे प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिनमें एक संकेंद्रित शुक्राणु नमूना ग्रैव अथवा योनि संक्रमण, सूजन अथवा अन्य विकारों से बचाकर सीधे गर्भाशय मं स्थापित किया जाता है।

सहायित प्रजनन की सफलता के लिए प्रत्येक जोड़े के वास्ते चिकित्सा और वैज्ञानिक दोनों प्रकार के दृष्टिकोणों के तालमेल और डाक्टरों, साइंसदानों, नर्सों व सलाहकारों के बीच बढ़िया तालमेल जरूरी होता है। हर मरीज के इलाज के हर एक कदम पर पूरी सावधानी के साथ पैनी नजर रखकर उन्हें हंसता खेलता तंदरूस्त बच्चा देने की संभावना बढ़ाई जा सकती है।

उन अनेक जोड़ों के लिए, जो पारंपरिक चिकित्सा और शल्योपचार आजमा चुके हैं, ये नई तकनालाजी गर्भधारण की उम्मीद जगा सकती है। इन तकनीकों के जरिये सभी जगह से हार मान चुकी महिलाओं तक की गोद भर चुकी है। 

पुरूषों में बंध्यता की अनेक वजह हो सकती हैं,
लेकिन करीब आधे मरीजों में कम शुक्राणु रिपोर्ट में
कोई कारण नहीं पाया जाता है



More Detail..!
गर्भधारण क्रिया सम्पन्न होने के लिए शुक्राणुओं का
परिवहन योनि, गर्भाशयग्रीवा और गर्भाशय से
 होकर फेलोपियन नलियों तक होना, सामान्य
कूप की उत्पत्ति एवं विकास, डिम्ब  उत्सर्जन
तथा उसका परिवहन फेलोपियन नलियों
के संचयन भाग तक होना,


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डा. सुमीता सोफत अस्पताल अपनी नई खोजों, ईमानदारी, मेडिकल और तकनीकी उत्कृष्टता तथा हर व्यक्ति को उसकी जरुरत के मुताबिक सेवाएं प्रदान करने और बिगड़े केस को भी एक चुनौती के रूप में स्वीकार करने की दिली इच्छा के लिए जाने जाते हैं।

हम सर्वोच्च संभव सफलता दर पाने की कोशिश करते हैं, इसलिए हमारे अधिकतर मरीज गर्भधारण करते हैं।

arrowसख्त गुणवत्ता नियंत्रण हमारी ऊंची आईवीएफ सफलता दर में वृद्वि करता है
arrowहम प्रत्येक मरीज पर अलग से तथा विशेष ध्यान देते हैं। 
 

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