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क्या गर्भावस्था के दौरान दी जाने वाली ये 3 सलाहें सिर्फ मिथ होती हैं? डॉक्टर से जाने इसके बारे में! 

ICSI treatment preparation tips at Dr. Sumita Sofat Hospital for better fertility outcomes.

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दरअसल, यह हर बार देखने को और सुनने को मिलता है, कि जब भी कोई महिला माँ बनती है, तो उस को लोग तरह- तरह की बातों को अपनाने के लिए कहते हैं। यानी कि गर्भवती महिला को हर कोई तरह- तरह की सलाह को प्रदान करता है और चला जाता है। हालांकि, इस तरह की स्थिति के दौरान गर्भवती महिला को स्त्री रोग विशेषज्ञ की हर सलाह का गंभीरता से पालन करना चाहिए। पर, इसके इलावा, भी कई लोग अपनी राय दिए बिना मानते नहीं है, तो इस तरह की स्थिति के दौरान गर्भवती महिला काफी ज्यादा सोच में पड़ जाती है और उसके लिए इन बातों को समझना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है, कि वह आखिर इस दौरान किन बातों को मानें और किन बातों को नज़रअंदाज कर दे। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि सिर्फ एक यही कारण होता है, कि आज के समय में हमारे सामने ज्यादातर गर्भावस्था से जुड़ी बहुत सी ऐसी बातें होती हैं, जिन पर लोग अपनी अलग अलग राय प्रदान करते हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति के दौरान गर्भवती महिला एक गहरी सोच में पड़ने के साथ-साथ, इसकी वजह से उसकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है। जिस से गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास में काफी ज्यादा रुकावट पैदा हो जाती है। दरअसल, ऐसे में बहुत सी महिलाएं अपनी सारी कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए जानना चाहती हैं, कि क्या गर्भावस्था के दौरान कही जाने वाली ये बातें सिर्फ मिथ होती हैं? जिसमें गर्भावस्था का मतलब दो लोगों का भोजन करना, बिना अल्ट्रासाउंड किए बच्चे के सेक्स का पता करना, केवल सुबह के समय ही महिला को मॉर्निंग सिकनेस होना, प्रेगनेंसी के दौरान सेक्स न करना और एक ऑपरेशन होने के बाद दूसरी डिलीवरी का नॉर्मल न होना जैसी मिथ शामिल होती हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इन मिथों के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

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मिथ 1: गर्भावस्था का मतलब महिला को अब दो लोगों का भोजन करना होता है!

सच: दरअसल, हां यह बात बिल्कुल सच होती है, कि गर्भावस्था के दौरान एक महिला को अपनी कैलोरी के साथ-साथ पोषक तत्वों के सेवन को भी बढ़ाने की काफी ज्यादा जरूरत होती है, पर इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं होता है, कि आपको इस दौरान दो लोगों जितना भोजन करने की जरूरत होती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि जरूरत से ज्यादा खाने का सेवन करने, विशेष तौर पर गलत तरह का भोजन का सेवन करने से न सिर्फ आपको मोटापे का सामना करना पड़ सकता, बल्कि गर्भावस्था के बाद आपके लिए इस वजन को कम करना काफी ज्यादा मुश्किलों से भरा हो सकता है। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान मोटापा जेस्टेशनल डायबिटीज और डायबिटीज जैसी समस्या का कारण बन सकता है, जो बच्चे की सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। 

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मिथ 2: बिना अल्ट्रासाउंड किए बच्चे के सेक्स का पता लगाया जा सकता है!

सच: दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि आज के समय में लोगों में यह मिथ काफी ज्यादा प्रचलित है, कि अल्ट्रासाउंड किए बिना ही गर्भ में पल रहे बच्चे के सेक्स का पता किया जा सकता है। इस तरह की स्थिति के दौरान ऐसी बहुत सी महिआएं हैं, जो इस बात का दावा करती हैं, कि वह एक गर्भवती महिला के पेट का आकार, शेप और उसकी खाने-पीने की पसंद के हिसाब से महिला के गर्भ में लड़का है या फिर लड़की यह बता सकती हैं। दरअसल, आपकी कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए आपको बता दें, कि लोगों द्वारा की जाने वाली यह बात पूरी तरीके से एक मिथक है। आम तौर पर, अगर आप पेट से हैं, तो लोगों की इन बातों पर ध्यान देने की बजाए आप अपनी सेहत का ध्यान रखें और गर्भ में पल रहे बच्चे को एक अच्छा और सेहतमंद पोषण प्रदान करें, जिससे कि उसका शारीरिक और मानसिक विकास अच्छे तरीके से हो सके। हालांकि, आप इस के बारे में जानते ही, होंगे कि एक गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जांच करवाना पूरी तरीके से गैरकानूनी होता है।

मिथ 3: गर्भवती महिला को मॉर्निंग सिकनेस केवल सुबह के समय ही होते हैं!

सच: आम तौर पर, गर्भावस्था जैसी स्थिति के दौरान बहुत से लोगों को लगता है, कि एक गर्भवती महिला को उल्टी होना, चक्कर आना और जी मचलना जैसे मॉर्निंग सिकनेस केवल सुबह के समय ही होते हैं, जबकि लोगों द्वारा कही जाने वाली यह बात बिल्कुल सही नहीं है। सच तो यह है, कि एक गर्भवती महिला को यह मॉर्निंग सिकनेस दिनभर में कभी भी हो सकते हैं। हालांकि, डॉक्टरों के अनुसार, केवल 2 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस केवल सुबह के समय ही होते हैं। पर,

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इस समस्या के लक्षण महिलाएं दिन भर में कभी भी महसूस कर सकती हैं। अगर इस अवस्था में, लक्षण ज्यादा गंभीर हैं, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि यह हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम की स्थिति का संकेत भी हो सकता है। 

निष्कर्ष: गर्भावस्था के दौरान लोगों द्वारा दी जाने वाली सलाह पर विश्वास करने से पहले या फिर उन को अपनाने से पहले आपको एक बार अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान होने वाली किसी भी तरह की समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और गर्भावस्था से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही सुमिता सोफत अस्पताल में जाकर इस के विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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