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क्या महिला नसबंदी स्थायी गर्भनिरोधक का एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है?

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दरअसल नसबंदी एक तरह की स्थायी प्रक्रिया है। इसलिए इस को हमें ध्यान से और बड़े ही सोच समझकर करवाना चाहिए। मतलब कि जब आपके बच्चे थोड़े बड़े हो जाएँ और अगर आपके बच्चे दिमागी तोर से बिलकुल ठीक हो या फिर आपको इस बात का पूरा यकीन है, कि अब आपको और बच्चों की अभिलाषा नहीं है। आपको बता दें कि पुराने जमाने में नसबंदी प्रजनन को रोकने के लिए एक बहुत ही अच्छा तरीका माना जाता था, पर आज के समय में प्रजनन को रोकने के लिए और भी ज्यादा कारगर तरीके आ गए हैं। 

नसबंदी क्या है और ये कब करवानी चाहिए? 

आमतौर पर यह एक शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है और एक स्थायी गर्भनिरोधक तरीका है। बता दें कि पुरुषों में इसे वैसेक्टोमी और महिलाओं में इस को ट्यूबल लिगेशन कहा जाता है। दरअसल इसमें महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब्स को काटकर या फिर बांधकर उसको बंद कर दिया जाता है। आमतौर पर इस से अंडाणु और शुक्राणु यों का मिलान नहीं हो पाता है और साथ ही गर्भधारण की संभावना खत्म हो जाती है। आपको बता दें कि यह प्रक्रिया काफी ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती है, पर इसको तभी कराया जाता है, जब महिला अपना परिवार पूरा कर चुकी है।

किन परिस्थितियों में नसबंदी को करवाना उचित होता है?

1. दरअसल जब आप आगे गर्भधारण नहीं करना चाहतीं और साथ ही जब आपका परिवार पूरा हो चुका होता है (आप के 2 या 3 बच्चे हो चुके हों)।

2. जब गर्भावस्था से जुड़ी कोई स्वास्थ्य समस्या हो या फिर डॉक्टर आपको दोबारा प्रेग्नेंसी के लिए मना करें।

3. आमतौर पर नसबंदी एक स्थायी गर्भनिरोधक प्रक्रिया है, जिसको तब ही करवाना चाहिए, जब जोड़ा भविष्य में और बच्चे पैदा नहीं करना चाहता।

4. आमतौर पर नसबंदी के लिए सही वक्त तब होता है, जब आप मानसिक और भावनात्मक रूप से इस फैसले के लिए तैयार होते हैं। 

5. इस फैसले को तब लेना चाहिए जब, आपकी उम्र 25 वर्ष से ज्यादा की हो।

6. दरअसल अगर आप गर्भनिरोधक गोलियों या फिर आईयूडी जैसे अस्थायी उपायों से थक चुकी हों।

7. आमतौर पर नसबंदी का फैसला सोच-समझकर, भावनात्मक और मानसिक रूप से तैयार होकर करना बहुत ज्यादा जरूरी होता है।

महिला नसबंदी के प्रकार

आमतौर पर महिलाओं के लिए नसबंदी यानी कि ट्यूबेक्टोमी दरअसल सिजेरियन सेक्शन के साथ और मिनी लैप या मिनी टूबेक्टॉमी इन दो विशेष तरीकों से की जा सकती है। दरअसल इन दोनों का चयन, डॉक्टरी स्थिति,स्वास्थ्य स्थिति, डिलीवरी का प्रकार (नॉर्मल या सिजेरियन), और भविष्य की पारिवारिक योजना पर निर्भर करता है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इन दोनों तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

1. सिजेरियन डिलीवरी के दौरान नसबंदी

दरअसल इस दौरान अगर एक महिला की डिलीवरी सिजेरियन के माधयम से की जा रही है, तो उसी वक्त फैलोपियन ट्यूब्स को बंद करके महिला की नसबंदी की जा सकती है। आमतौर पर यह विकल्प दरअसल उन महिलाओं के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, जो यह पहले से ही तय कर चुकी होती है, कि उनको आगे चलकर कोई और संन्तान नहीं चाहिए। बता दें की यह प्रक्रिया आमतौर पर एक ही वक्त में डिलीवरी और नसबंदी दोनों को पूरा कर देती है, जिसमें अलग से सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है।आमतौर पर हालांकि डिलीवरी के दौरान ट्यूब्स अक्सर सूजी और अधिक संवेदनशील होती हैं, इसलिए कुछ डॉक्टर इस समय नसबंदी से परहेज की सलाह देते हैं। जिसकी वजह से अगर भविष्य में ट्यूब रिवर्सल की ज़रूरत पड़े, तो यह काफी ज्यादा जटिल हो सकता है। पर फिर भी कुछ डॉक्टरी परिस्थितियों में, डॉक्टर महिला की सुरक्षा और साथ ही उनकी सहमति होने पर वह उसी समय नसबंदी की प्रक्रिया कर देते हैं। 

2. मिनी लैप या मिनी ट्यूबेक्टोमी

मिनी लैप या मिनी ट्यूबेक्टोमी को एक स्थायी गर्भनिरोधक प्रक्रिया कहा जाता है। दरअसल यह प्रक्रिया सिजेरियन डिलीवरी से स्वतंत्र होती है और आमतौर पर महिला की डिलीवरी के कुछ हफ़्तों या फिर महीनों के बाद  की जाती है। दरअसल इसमें लेप्रोस्कोपी यानी कि दूरबीन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर यह प्रक्रिया कम इनवेसिव होती है और एक छोटे चीरे के साथ की जाती है। इसमें महिला की रिकवरी तेज और काफी ज्यादा आरामदायक होती है। दरअसल इस प्रक्रिया दौरान पेट के निचले हिस्से में एक छोटा सा चीरा लगाकर एक विशेष उपकरण की मदद से फैलोपियन ट्यूब्स को रबर बैंड या फिर क्लिप के जरिये बंद कर दिया जाता है। आमतौर पर यह उन महिलाओं के लिए काफी ज्यादा उपयुक्त होता है, जो आगे चलकर गर्भधारण नहीं करना नहीं चाहतीं हैं। बता दें कि इस तकनीक को मिनी ट्यूबेक्टोमी भी कहा जाता है।

मिनी ट्यूबेक्टोमी के मुख्य फायदे

1. कम से कम दर्द और तेज रिकवरी : 

दरअसल इस प्रकिरिया के दौरान एक महिला को लंबे समय तक अस्पताल में रुकने की ज़रूरत नहीं पड़ती है और वह जल्दी ही अपनी आम जीवनशैली में वापिस लौट सकती हैं।

2. फैलोपियन ट्यूब को न्यूनतम नुकसान : 

आमतौर पर इस प्रक्रिया में फैलोपियन ट्यूब को कम से कम नुकसान पहुंचता है, क्योंकि यह प्रक्रिया तब होती है, जब ट्यूब आम स्थिति में होती हैं। इसलिए इस प्रक्रिया के दौरान सूजन काफी कम होती है और टिशू को ज्यादा नुकसान नहीं होता है। 

3. भविष्य में रिवर्सल की संभावना बेहतर: 

बता दें कि अगर भविष्य में कभी महिला को संतान की थोड़ी सी भी जरूरत महसूस होती है, तो रिवर्सल की सफलता दर उन औरतों में काफी ज्यादा होती है, जिन्होंने मिनी ट्यूबेक्टॉमी करवाई होती है। 

महिला नसबंदी के बाद क्या सावधानियां जरूरी है?

बता दें कि ट्यूबेक्टोमी भले ही एक सुरक्षित प्रक्रिया हो, पर आमतौर पर महिलाओं को इस ऑपरेशन के बाद कुछ सावधानियों को अपनाना बहुत ज्यादा जरूरी होता है, ताकि ऑपरेशन के बाद की जटिलताओं से अपना बचाव किया जा सके और साथ ही तेजी से रिकवरी हो सके। आमतौर पर महिला नसबंदी के बाद निम्नलिखित सावधानियों को बरतना चाहिए। 

1. दरअसल महिलाओं को ऑपरेशन के बाद डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों को समय पर लेना चाहिए और अपना पूरा कोर्स लेना चाहिए। 

2. आमतौर पर जोड़े को इस बात का ख़ास ध्यान रखना चाहिए कि उनको सर्जरी के बाद पहले 7 दिनों तक शारीरिक संबंध से अपना परहेज करना चाहिए। 

3. इसके अलावा, अगर आपके मासिक धर्म में किसी भी तरह की देरी हो रही है, तो इस दौरान आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

4. सर्जरी के बाद अपने डॉक्टर से नियमित रूप से सलाह लेनी चाहिए, या फिर डॉक्टर के साथ अपने फॉलो अप का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

5. बता दें कि अगर सर्जरी के बाद आपको किसी भी प्रकार का दर्द, सूजन, तेज बुखार और चीरे से खुल रिसाव जैसी समस्या आ रही हो, तो इस दौरान आप तुरंत अपने सर्जन डॉक्टर से संपर्क करें। 

महिला नसबंदी के फायदे 

वास्तव में महिला नसबंदी उन महिलाओं के लिए एक प्रभावी और एक अच्छा विकल्प होता है, जो कि गर्भ नियंत्रण के एक स्थायी उपाय को अपनाना चाहती हैं। आमतौर पर यह ज्यादातर महिलाओं के लिए सुरक्षित होता है और साथ ही इसमें असफलता की दर बहुत कम होती है। बता दें कि महिला नसबंदी सिर्फ एक बार का फैसला होता है, जो एक महिला को जीवन भर के लिए गर्भनिरोधक प्रदान करता है। दरअसल इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी खूबी यही है, कि यह हार्मोन या फिर माहवारी पर कोई बुरा प्रभाव नहीं डालती है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं, 

1. स्थायी समाधान: दरअसल महिला को एक बार नसबंदी कराने के बाद दोबारा गर्भधारण करने की बिल्कुल चिंता नहीं रहती है।

2. कम साइड इफेक्ट्स: बता दें कि महिला नसबंदी के बाद इस दौरान न महिला के हार्मोनल बदलाव होते हैं और न ही पीरियड्स में कोई गड़बड़ी होती है ।

3. कोई दीर्घकालिक दवा या उपकरण नहीं: दरअसल इसमें महिला को आईयूडी, इंजेक्शन या फिर कोई दीर्घकालिक दवा और किसी भी तरह की गर्भनिरोधक गोलियों की जरूरत नहीं पड़ती है। 

4. वास्तव में इस की असफलता दर बहुत कम है: लगभग <1% के आसपास और यह बहुत ज्यादा विश्वसनीय है। 

क्या महिला नसबंदी को दोबारा खोला जा सकता है? 

आमतौर पर इस तरीके का सवाल अक्सर उन महिलाओं के मन में आता है, जिन्होंने पहले से ही नसबंदी करवाई होती है, लेकिन आमतौर पर समय के साथ हालात बदल जाते हैं, और वह दोबारा से गर्भधारण करने की इच्छा रखने लगती हैं। बता दें कि नसबंदी को स्थायी प्रक्रिया माना जाता है, पर इसके कुछ ख़ास मामलों में इसको रिवर्स यानी कि इसको फिर से खोला जा सकता है। इसे ट्यूबल रिवर्सल सर्जरी कहा जाता है 

आपको बता दें कि रिवर्स यानी कि इस को दोबारा से खोलना तभी संभव होता है, जब महिला की नसबंदी मिनी लैप या फिर रबर बैंड क्लिपिंग जैसी कम आक्रामक तकनीकों द्वारा की गई हो। आमतौर पर जिस में ट्यूब्स को कम से कम नुकसान पहुंचा हो। दरअसल इसके इलावा, अगर महिला की नसबंदी 5 साल से कम पुरानी है और साथ ही महिला कम उम्र की है, तो इस दौरान सफलता की संभावना और भी ज्यादा बढ़ जाती है। 

हालांकि आपको बता दें कि यह प्रक्रिया 100% सफल नहीं होती है। आमतौर पर इस प्रक्रिया की सफलता दर कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि महिला की उम्र, ट्यूब्स की लंबाई और इस की स्थिति, और साथ ही नसबंदी के दौरान अपनाई गई तकनीक। बता दें कि डॉ. सुमिता सोफत हॉस्पिटल में इससे पहले पूरी मेडिकल जांच की जाती है और फिर विशेषज्ञ, नसबंदी की संभावना का सही आकलन करने के बाद ही सलाह देते हैं। आमतौर पर अगर ट्यूब को खोलना संभव न हो, तो इस दौरान आपके लिए IVF एक प्रभावी वैकल्पिक रास्ता हो सकता है।

क्या नसबंदी के बाद महिला मां नहीं बन सकती?

बता दें कि महिला नसबंदी या फिर ट्यूबेक्टोमी एक प्रकार की स्थायी गर्भनिरोधक प्रक्रिया है,आमतौर पर जिसमें महिला की फैलोपियन ट्यूब्स को इस तरीके से बंद कर दिया जाता है, कि अंडाणु और शुक्राणु का आपस में मिलन बिलकुल भी संभव नहीं होता है। दरअसल इस कारण की वजह से ही प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करना महिला के लिए संभव नहीं रहता। हालांकि आपको बता दें कि इसका मतलब यह नहीं है, कि एक महिला कभी भी मां नहीं बन सकती। दरअसल इस दौरान आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) जैसी आधुनिक प्रजनन तकनीकों के माध्यम से महिला दोबारा से गर्भधारण कर सकती है, भले ही उस महिला की ट्यूब बंद हों। आपको बता दें कि IVF एक सफल प्रजनन प्रक्रिया है। दरअसल IVF में अंडाणु और शुक्राणु को शरीर के बाहर (प्रयोगशाला में) मिलाकर भ्रूण को बनाया जाता है और साथ ही फिर उसको सीधे गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। आमतौर पर अगर अपने अपनी नसबंदी कराई है और आप अपने भविष्य में संतान की इच्छा रखती हैं, तो इस दौरान आपके लिए IVF एक सुरक्षित और प्रभावशाली विकल्प बन सकता है।

क्या नसबंदी की प्रक्रिया दर्दनाक होती है?

दरअसल महिला नसबंदी की प्रक्रिया आमतौर पर बहुत ज्यादा दर्दनाक नहीं होती है, क्योंकि इस प्रकिरिया को सर्जरी के माध्यम से किया जाता है और साथ ही यह पूरी तरह एनेस्थीसिया (स्थानीय या सामान्य) के तहत होती है। आमतौर पर इसका मतलब है, कि ऑपरेशन के दौरान महिला को कोई भी दर्द महसूस नहीं होता है। आपको बता दें कि महिला नसबंदी (ट्यूबेक्टॉमी) में महिला के पेट पर एक छोटा चीरा लगाया जाता है और फिर  फैलोपियन ट्यूब को बांधा या फिर काट दिया जाता है। दरअसल इस प्रकिरिया के दौरान महिला किसी भी तरह की समस्या महसूस नहीं होती है, पर प्रक्रिया के बाद हल्का दर्द, सूजन या फिर थकान होना एक आम बात होती है, जो आमतौर पर दवाइयों और आराम करने से कुछ ही दिनों बाद अपने आप ठीक हो जाती है। अगर मिनी लैप या फिर लैपरोस्कोपिक ट्यूबेक्टॉमी की जाती है, तो यह बहुत ही कम आक्रमक होती है और इसमें महिला की रिकवरी बहुत ही ज्यादा आरामदायक रहती है। हालांकि विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा की जाने वाली यह प्रक्रिया, आधुनिक तकनीक और बेहतर पोस्ट-ऑप देखभाल दर्द और बेआरामी को काफी हद तक कंट्रोल करती है। कुल मिलाकर इसको एक सुरक्षित और आम प्रक्रिया मानी जाती है।

नसबंदी के बाद एक महिला को रिकवर होने में कितना समय लगता है?

आपको बता दें कि नसबंदी के बाद एक महिला की रिकवरी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है, कि उसने किस तकनीक के इस्तेमाल से ट्यूबेक्टोमी करवाई है। वास्तव में अगर महिला की नसबंदी मिनी लैप्रोस्कोपी या फिर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से की गई है, तो रिकवरी अपेक्षाकृत तेजी से होती है। आमतौर पर इस दौरान ज्यादातर महिलाएं 3 से 5 दिनों के अंदर ही हल्की गतिविधियों के लिए तैयार हो जाती हैं और साथ ही एक सप्ताह के अंदर वह आम दिनचर्या में वापस लौट सकती हैं। हालांकि इस दौरान एक महिला को भारी काम, व्यायाम या फिर यौन संबंधों को बनाने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह करना बहुत ज्यादा जरूरी होता है। आमतौर पर कुल मिलाकर इस दौरान अगर कोई जटिलता न हो, तो यह प्रक्रिया कम जोखिम से भरी और जल्दी से ठीक होने वाली मानी जाती है, विशेष रूप से सुमिता सोफत हॉस्पिटल जैसे अनुभवी क्लिनिक में। 

क्या नसबंदी कराने से महिला के पीरियड्स रुक जाते हैं?

नहीं, महिला नसबंदी करवाने के बाद महिला के पीरियड्स (मासिक धर्म) पर किसी भी प्रकार का कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। दरअसल इस प्रक्रिया में सिर्फ फैलोपियन ट्यूब को बांधा या फिर काटा जाता है, ताकि अंडाणु और शुक्राणु का मिलन न हो सके। आपको बता दें कि इस दौरान हार्मोनल बैलेंस, ओवुलेशन और साथ ही मासिक चक्र की प्रक्रिया उसी तरह जारी रहती है, जैसे पहले होती थी। दरअसल एक महिला की नसबंदी के बाद भी महिला के अंडाशय अंडाणु को उत्पन्न करते हैं, पर आमतौर पर वह ट्यूब से होकर गर्भाशय तक नहीं पहुंच पाते हैं। इसलिए इस दौरान महिला के पीरियड्स आम रूप से आते रहते हैं और इसका यौन इच्छा या फिर हार्मोनल बदलावों पर किसी भी तरह का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है। बता दें कि यह एक बहुत ही बड़ा कारण है, कि नसबंदी को सुरक्षित और साथ ही जीवनशैली में बिना बाधा लाने वाला विकल्प माना जाता है।

क्या नसबंदी मुफ्त में कराई जा सकती है?

आमतौर पर भारत में कुछ सरकारी योजनाएं और स्वास्थ्य केंद्र मुफ्त में या फिर बहुत कम कीमत पर नसबंदी की सुविधा को प्रदान करते हैं। बता दें कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और कम आय वर्ग की महिलाओं को ज्यादातर ध्यान में रखकर यह योजनाएं शुरू की गई है। आमतौर पर हालांकि कभी-कभार सरकारी अस्पतालों में लंबी प्रतीक्षा अवधि, सीमित संसाधन और साथ ही काउंसलिंग की कमी हो सकती है। बता दें कि इसके विपरीत निजी क्लिनिक जैसे कि डॉ. सुमिता सोफत हॉस्पिटल में आमतौर पर नसबंदी का तजुर्बा काफी ज्यादा सुरक्षित, निजी और साथ ही काफी ज्यादा प्रोफेशनल होता है। दरअसल यहां के विशेषज्ञ डॉक्टर, आधुनिक तकनीक, और कस्टमाइज़्ड केयर यह सुनिश्चित करते हैं, कि पूरी प्रक्रिया एक औरत की शारीरिक और मानसिक सेहत को ध्यान में रखकर की जाए। हालांकि इसलिए महिलाओं को निर्णय लेने से पहले विकल्पों की तुलनात्मक जानकारी जरूर लेनी चाहिए। 

क्यों भरोसा करें डॉ. सुमिता सोफट हॉस्पिटल पर?

आमतौर पर महिला नसबंदी जैसे कि संवेदनशील और  साथ ही स्थायी निर्णय लेने के लिए एक विश्वसनीय, उन्नत और महिला-केंद्रित क्लिनिक को चुनना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। लुधियाना स्थित डॉ. सुमिता सोफत हॉस्पिटल आमतौर पर इसी विश्वास और देखभाल का प्रतीक है, दरअसल यहां हर महिला को उनकी जरूरत और सेहत के साथ साथ उनके भविष्य को ध्यान में रखकर इलाज किया जाता है। 

बता दें कि चाहे बात हो नसबंदी की या फिर ट्यूबल रिवर्सल जैसे ख़ास मामलों की दरअसल डॉ. सुमिता सोफत हॉस्पिटल की अनुभवी टीम हर महिला के शरीर और साथ ही उनके मन की ज़रूरत को समझते हुए ही, उनका मार्गदर्शन और उपचार प्रदान करती है। वाकई, लुधियाना का यह विश्वसनीय फर्टिलिटी सेंटर आधुनिक तकनीक और संवेदनशीलता के साथ आपके सभी डर का समाधान है।

निष्कर्ष

नसबंदी एक तरह की स्थायी प्रक्रिया है। इसलिए इस को हमें बड़े ही ध्यान से और बड़े ही सोच समझकर करवाना चाहिए। क्योंकि यह एक प्रकार का स्थायी गर्भनिरोधक तरीका है। नसबंदी, ट्यूबल रिवर्सल या फिर IVF से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी को प्राप्त करने के लिए आप आज ही डॉ. सुमिता सोफत हॉस्पिटल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं। और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

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