आईवीएफ क्या है और क्या पहले ही प्रयास से हो सकता है आईवीएफ सफल? जाने एक्सपर्ट्स से क्या है उनकी राय 

विस्तार :-आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से प्राकृतिक रूप से महिलाओं  को गर्भधारण करने में सहायता मिलती है | जिन महिलाओं को गर्भधारण कंसीव करने में कठिनाई हो रही है, उनको डॉक्टर के द्वारा आईवीएफ ट्रीटमेंट की सलाह दी जाती है | आईवीएफ करवाने के लिए डॉक्टर के द्वारा कुछ टेस्ट किये जाते है | जिससे डॉक्टर के द्वारा प्रयोगशाला में अंडों और शुक्राणु को मिलाया जाता है, जिससे बच्चे के जन्म की शुरुआत होती है।वर्तमान समय में आईवीएफ प्रक्रिया काफी लोगों के लिए सहायक सिद्ध हुई है| आईवीएफ एक सुरक्षित प्रक्रिया है, जो गर्भधारण करने की संभावनाओं को बढ़ावा देती है।

भारत में सफलता का दर ? 

अगर कोई व्यक्ति पहली बार IVF को चुनता है तो वह सबसे पहले सफलता दर को जानने की कोशिश करता है |  आईवीएफ की सफलता दर कई कारणों पर निर्भर करती है। जिसमें महिलाओं की उम्र,अंडाणुओ और शुक्राणुओं की गुणवत्ता, चिकित्सा समस्या, और कलीनिक की विशेषज्ञता शामिल है।निम्नलिखित बिन्दुओं के कारण आईवीएफ की सफलता दर को समझा सकते है :- 

35 वर्ष से कम :- इस आयु वर्ग में आईवीएफ की सफलता दर 40-50% अधिक होती है।

35-37 वर्ष :- इस आयु समूह में सफलता दर लगभग 30-40% होती है।

38-40 वर्ष :-   इस आयु वर्ग  में सफलता दर लगभग 20-30% होती है।

40 वर्ष से अधिक :-इस आयु वर्ग में आईवीएफ की सफलता दर 10 -20% होती है। जिसके कारण आईवीएफ के काम करने की क्षमता कम हो जाती है |    

आईवीएफ के मुख्य चरण:-

ओवेरियन स्टिम्युलेशन (अंडाशय की उत्तेजना) :महिलाओं को हार्मोनल दवाई दी जाती है जिससे अंडाशय में अधिक अंडाणु विकसित हो सके।

एग रिट्रीवल (अंडाणु संग्रह):-जब अंडाणु परिपक्त हो जाते है,तो उन्हें एक छोटा सर्जिकल प्रक्रिया के माध्यम से अंडाशय से निकाला जाता है।

एब्रायो कल्चर (भ्रूण संवर्धन):- भ्रूण को थोड़े दिन लैब में बढ़ने दिया जाता है, ताकि उनकी गुणवत्ता और विकास का निरीक्षण किया जा सके।

भ्रूण का ट्रांसफर :– स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थानतारिक किया जाता है। यदि भ्रूण सफलतापूर्वक गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाता है, तो इसका अर्थ है की आईवीएफ सफलतापूर्वक कंसीव हो गया है | 

निष्कर्ष :- आईवीएफ की सफलता दर व्यक्तिगत कारणों और चिकित्सा परिस्थितियों के आधार पर भिन्न होती है। हालांकि उचित चिकित्सा मार्गदर्शन, स्वस्थ जीवनशैली और धैर्य के साथ, आईवीएफ एक सफल विकल्प साबित हो सकता है। महत्वपूर्ण है कि आप अपने डॉक्टर से परामर्श लें और अपने सभी विकल्पों को समझे ताकि आप सही निर्णय ले सके।        

 इससे संबंधित कोई भी जानकारी के लिए आप आप डॉ सुमिता सोफट हॉस्पिटल से परामर्श कर सकते है | यहाँ के  डॉक्टर सुमिता सोफट जो की आईवीएफ में स्पेशलिस्ट है और उन्हें 28 से भी अधिक सालों का तजुर्बा है|

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