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क्या वाकई बल्की यूटेरस एक गंभीर समस्या होती है? डॉक्टर से जानें इसके कारणों के बारे में!

Illustration of a doctor and couple discussing genetic screening for IVF.

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दरअसल, जैसे- जैसे आज लोगों की उम्र में बढ़ोतरी हो रही है, वैसे -वैसे उनको शरीर से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसमें बल्की यूटेरस की समस्या होना भी शामिल है। यह महिलाओं में काफी आम देखी जा सकती है, यह समस्या सभी महिलाओं को प्रभावित कर सकती है। आम तौर पर, महिलाओं के शरीर में होने वाली इन समस्याओं के पीछे बहुत से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। बल्की यूटेरस के कारण महिलाओं को एक नहीं बल्कि कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिस में तनाव होना बच्चा न हो पाने का डर बना रहना जैसी कई समस्याएं शामिल होती हैं। 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि बच्चादानी जिस को यूटेरस के नाम से भी जाना जाता है। आम तौर पर, महिलाओं में यह फर्टिलिटी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग होता है, जहां गर्भावस्था के दौरान बच्चे का विकास होता है। पर, हम में से ज्यादातर लोग यह नहीं जानते हैं, कि यह क्या होता है? दरअसल आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि जब किसी महिला की बच्चेदानी सामान्य आकार से काफी ज्यादा बड़ी या फिर भारी हो जाती है, तो इसको डॉक्टरी भाषा में बल्की यूटेरस के नाम से जाना जाता है, जो हर महिला को प्रभावित कर सकती है। आम तौर पर, ऐसा कहा जाता है, कि यह समस्या विशेष तौर पर 30 साल की उम्र के बाद अधिकतर महिलाओं में देखने को मिल सकती है, जो कहीं न कहीं सच भी है। 

बच्चेदानी का भारीपन यानी कि बल्की यूटेरस की समस्या को लेकर अक्सर ही महिलाओं के मन में चिंता, डर और काफी ज्यादा परेशानी बनी रहती है। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में वह इस हद तक सोचने पर मजबूर हो जाती हैं, कि कहीं वह किसी गंभीर बीमारी से तो पीड़ित नहीं हैं, या फिर यह किसी गंभीर कैंसर का संकेत तो नहीं है। दरअसल, आपका हर बार यह सोचना आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए, ऐसे में पहले अपने आप को शांत करें और डॉक्टर से मिलें। 

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हालांकि, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हर बार बल्की यूटेरस का मतलब कोई बड़ी या फिर कोई गभीर समस्या नहीं होता है, इसलिए इस दौरान ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होती है, पर हाँ पता लगने पर अगर इलाज न करवाया जाये, तो गंभीर समस्या का कारण बन सकता है। इसके अलावा, यह एक तरह से संकेत हो सकता है, कि आपके शरीर में कोई असामान्य बदलाव हो रहा है। समय पर इलाज न होने पर यह समस्या बढ़ सकती है और इनफर्टिलिटी और अन्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है। 

इसलिए समय पर शरीर में उत्पन्न होने वाली समस्याओं का इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आम तौर पर, महिलाओं में यह समस्या कई कारणों की वजह से हो सकती है, जिसमें हार्मोनल असंतुलन, गांठ बनना, एडिनोमायोसिस, पेरिमेनोपॉज में बदलाव होना शामिल हो सकता है। हालांकि, कई बार यह समस्या बिना किसी लक्षण के भी उत्पन्न हो सकती है, जिसके कारण कई बार इसको नजरअंदाज कर दिया जाता है। पर, फिर भी कई महिलाओं को इस दौरान पेट में भारीपन, अनियमित मासिक धर्म, ज्यादा ब्लीडिंग होना या फिर कमर दर्द होना जैसे कई लक्षण महसूस हो सकते हैं। इन्हीं लक्षणों के चलते इस समस्या का आसानी से पता लगाया जा सकता है। समस्या का पता चलते ही आपको तुरंत अपना इलाज करवाना चाहिए। समस्या बढ़ने पर आप अपने डॉक्टर से भी संपर्क कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

बल्की यूटेरस का किस तरह पता किया जा सकता है? 

दरअसल, निम्नलिखित उपायों के माध्यम से बल्की यूटेरस का पता लगाया जा सकता है, जैसे 

1. यूट्रस की स्थिति देखने के लिए अल्ट्रासाउंड से जांच की जा सकती है। 

2. फायब्रॉइड्स या फिर एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों में एमआरआई की मदद प्राप्त की जा सकती है। 

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3. गर्भाशय के अंदर का निरीक्षण करने के लिए हिस्टेरोस्कोपी की सहायता ली जा सकती है 

4. हार्मोनल असंतुलन या फिर इंफेक्शन की अच्छे से जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट का सहारा लिया जा सकता है। 

बल्की यूटेरस के क्या-क्या कारण हो सकते हैं? 

आम तौर पर, बल्की यूटेरस के कारण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे 

1. गांठ बनना 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गर्भाशय की दीवारों पर होने वाली इन गाठों को नॉन-कैंसर वाली गांठें कहा जाता है, जो बल्की यूटेरस जैसी समस्या का कारण बन सकती हैं। 

2. एंडोमीट्रियोसिस होना 

दरअसल, डॉक्टर के अनुसार इस तरह की स्थिति में गर्भाशय की अंदरूनी परत की कोशिकाओं का निर्माण बहार के स्थान पर होने लग जाता है। जिसकी वजह से ही एक महिला को यूटेरस में सूजन और भारीपन की समस्या महसूस हो सकती है। 

3. एडिनोमायोसिस होना 

आम तौर पर, एडिनोमायोसिस जैसी समस्या के दौरान भी बच्चेदानी में काफी ज्यादा भारीपन नजर आने लग जाता है। 

4. गर्भावस्था के बाद बदलाव होना 

जो महिलाएं इससे अनजान हैं, उनकी जानकारी के लिए बता दें, कि डिलीवरी होने के बाद बहुत सी महिलाओं में यूट्रस पूरी तरीके से सामान्य आकार में नहीं आ पाता है, जिसके कारण भी यह बल्की बना रहता है। 

5. हार्मोनल असंतुलन होना 

इस बात में कोई शक नहीं है, कि महिलाओं के शरीर में अक्सर ही हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं और इसके कारण ही उनको शरीर से जुड़ी कई तरह की समस्यायों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, शरीर में होने वाले एस्ट्रोजन हार्मोन का असंतुलन भी बच्चेदानी पर काफी ज्यादा असर डाल सकता है। 

5. पेरिमेनोपॉज या फिर मेनोपॉज होना 

दरअसल, इस तरह की स्थिति में आपको बता दें, कि पेरिमेनोपॉज या फिर मेनोपॉज से पहले के समय में भी महिला के यूट्रस में काफी ज्यादा बदलाव देखने को मिल सकता है। 

निष्कर्ष: महिलाओं को अपने जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसका सबसे बढ़ कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं। बच्चेदानी में भारीपन होना एक आम समस्या हो सकती है और कई मामलों में यह बिना लक्षण के उत्पन्न हो जाती है, जिसके कारण यह समस्या नजरअंदाज हो जाती है। यह समस्या नॉर्मल हार्मोनल बदलावों और फाइब्रॉएड या फिर एंडोमेट्रियोसिस जैसे ज़्यादा गंभीर कारणों के कारण भी हो सकती है। इसलिए, सभी को चाहिए, कि वो अपने शरीर के संकेतों को समझें, नियमित अपने शरीर की जांच कराएं और डॉक्टर की स्लाज लेना न भूलें। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और गर्भावस्था से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही सुमिता सोफत अस्पताल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. क्या महिलाओं में बल्की यूटेरस की समस्या होना आम होता है? 

दरअसल, हाँ ज्यादातर महिलाओं में बल्की यूटेरस या फिर बच्चेदानी में सूजन होना या फिर आकार बढ़ना एक बहुत ही आम समस्या मानी जाती है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं, जिसमें हार्मोनल असंतुलन होना, फाइब्रॉइड, एंडोमेट्रियोसिस या फिर एडिनोमायोसिस जैसे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। 

प्रश्न 2. किन महिलाओं को बल्की यूटेरस जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है? दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि विशेष तौर पर बल्की यूटेरस की समस्या उन महिलाओं में काफी आम देखी जाती है, जो पेरिमेनोपॉज हैं, 35 साल से ज़्यादा उम्र की हैं या फिर जिनको फाइब्रॉएड, एडेनोमायोसिस, हार्मोनल इम्बैलेंस या फिर प्रेगनेंसी से जुड़ी समस्याएं होती हैं। 

प्रश्न 3. क्या स्वस्थ महिलाओं को भी बल्की यूटेरस की समस्या का सामना करना पड़ सकता है? 

दरअसल, हाँ यह बात बिलकुल सच है, कि स्वस्थ महिलाओं को भी बल्की यूटेरस की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। यह समस्या सभी महिलाओं को प्रभावित कर सकती है।

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