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महिला बांझपन क्या है? किन प्रमुख कारणों से यह समस्या उजागर हो सकती है?

महिलाओं में बाँझपन की समस्या -

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आज कल की पीढ़ी के जोड़ों में बांझपन की समस्या बड़े पैमाने पे उजागर हो रही है| मर्द और औरत दोनों ही इस समस्या से ग्रसित हो सकते हैं| Male infertility in Punjab का अर्थ है पुरुषों का गर्भ धारण करने की प्रक्रिया में सहयोग न दे पाना|  माता पिता बनने का सुख लेना प्रत्येक जोड़े का हक़ एवं तमन्ना है| स्त्री रोग विशेषज्ञ का कहना है की बांझपन का अर्थ है किसी प्रमुख कारण वश गर्भधरण करने में समस्या होना| IVF Centre in Punjab के अनुसार यदि कोई स्त्री गर्भधरण करने के बाद गर्भपात का सामना करती है तो उसे भी बांझपन की समस्या में शामिल किया जा सकता है| 

बांझपन की समस्या बिलकुल ही आम तौर पर पायी जाने वाली समस्या है| अधिकतर जोड़े तक़रीबन १ साल तक अनप्रोटेक्टेड सेक्स करने के बाद भी गर्भ धारण करने में विफल हो जाते हैं| 

महिलाओं के बांझपन की समस्या निमनिखित कारणों से प्रकाशित हो सकती है:

  • अंडाशय विकार
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अंडाशय का काम होता है अंडे को सही प्रकार से विकसित करना, परन्तु अगर कभी अंडाशय अंडे को सही रूप से विकसित करने मैं सफल नहीं हो पता तो  बांझपन की समस्या स्वाभाविक तौर पर सामने आ सकती है| 

  • एंडोमेट्रिओसिस 

इस दोष का सीधा प्रभाव प्रजनन अंगो पर दिखता है| यही नहीं बल्कि मासिक धर्म में भी समस्या का सामना करना पड़ सकता है| इस दौरान स्त्री को न बर्दाश्त करने योग्य पीड़ा का अनुभव करना पड़ सकता है| इसके साथ साथ बहुत साड़ी महिलाओं में यह पाया गया है की एंडोमेट्रिओसिस के कहते रक्त स्राव बहुत ज़्यादा भी हो सकता है और कम भी| 

  • फॉलोपियन टयूब में परेशानी

फॉलोपियन टयूब प्रजनन तंत्र का एक हम भाग है| इस तंत्र का काम विकसित हुए अंडे को शुक्राणुओं के साथ मिलकर  भ्रूण बनाकर गर्भ में स्थापित करना होता है|  यदि किसी कारण के चलते इसमें किसी तरह का विकार पैदा हो जाये, तो यह अंडे को शुक्राणुओं के साथ मिलने नहीं देती, जिसके चलते एक स्त्री माँ बनने में परेशानी और देरी का सामना करती है|  

  • एंडोक्रोनी डिसऑर्डर
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इस दोष के चलते एक स्त्री में निम्नलिखित परेशानियों के अंश दिख सकते है:

  • थाइरॉइड
  • बांझपन
  • उम्र 

बहुत सारे स्त्री रोग विशेषज्ञों का मानना है की यदि कोई स्त्री २० से ३५ वर्ष की आयु के दौरान माँ बनने का प्रयास करती है, तो उसे किसी बी तरह की जटिलता का सामना नहीं करना पड़ेगा| यहां तक की वितरण भी प्राकृतिक और सामन्य रूप से हो जाता है|

  • तनाव 

प्रत्येक स्त्री रोग विशेषज्ञ का सुझाव है की प्रजनन प्रणाली की गुणवत्ता एवं स्वास्थ्य तभी बना रहता है यदि स्त्री मानसिक रूप से प्रफुल्लित रहे और तनाव का नामो-निशान न हो| 

  • अनियंत्रित जीवन शैली 

बहुत साड़ी महिलाओं में ये पाया जाता है कि वे एक अच्छी और संतुलित जीवनशैली का निर्वाह नहीं कर रही होती| जिसके चलते उन्हें निम्नलिखित दोषों का सामना करना पड़ता है जिस कारण गर्भ धारण करने में समस्या आती है:

  • मोटापा 
  • हार्मोनल असंतुलन

निष्कर्ष

अंत में यही कहा जा सकता है सर्वप्रथम तो स्त्रियों को सही उम्र में ही गर्भ धारण कर लेना चाहिए ताकि भविष्य में आने वाली जटिलताओं का कोई महत्व न रहे|

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