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क्या वाकई गर्भावस्था के दौरान महिला के रोने से बच्चे की सेहत पर पड़ सकता है बुरा प्रभाव? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

Undergoing ICSI Treatment

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दरअसल, इस बात से कोई भी अनजान नहीं है, कि गर्भावस्था एक महिला की जिंदगी का बहुत ही ख़ास पल होता है। माँ बनना बहुत सी महिलाओं का सामना होता है, जो पूरा होने पर उनको काफी ज्यादा ख़ुशी प्रदान करता है। आम तौर पर, इस दौरान एक महिला को ख़ुशी तो होती है, पर यह वक्त उनके लिए बहुत ही ज्यादा सेंसिटिव होता है। क्योंकि, इस दौरान गर्भवती महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसमें न केवल उनके शरीर में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं, बल्कि इस दौरान एक गर्भवती महिला की मानसिक और भावनात्मक स्थिति भी काफी तेजी से बदल जाती है। 

आम तौर पर, इस तरह की स्थिति के दौरान ज्यादातर महिलाओं के शरीर में हार्मोनल उतार-चढ़ाव होता है, जिसके कारण उनको काफी ज्यादा गुस्सा आना, छोटी -छोटी बातों पर चिल्लाना, गुस्सा करना, काफी ज्यादा चिंता करना या फिर किसी भी स्थिति में बिना वजह रो देना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण गर्भवती महिअलों में भावनाएं काफी ज्यादा तीव्र हो जाती हैं। जिसकी वजह से यह सब उन को अकेले ही झेलना पड़ता है। जिससे कहीं न कहीं बच्चे की सेहत भी काफी ज्यादा प्रभावित हो जाती है। इस दौरान महिला को अपनी सेहत का भी ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि जब एक माँ की सेहत एक दम ठीक और स्वस्थ रहती है, तो पेट में पलने वाले बच्चे की सेहत भी बेहतर बनी रहती है। 

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दरअसल, इस तरह की स्थिति में जब कोई महिला काफी ज्यादा रोती है और सिर्फ तनाव में ही फंसी रहती है, तो ऐसे में बहुत सी महिलाओं और परिवार वालों के मन यह स्लाव जरूर उठता है, कि इसकी वजह से कहीं उन के बच्चे की सेहत पर तो बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा? इस तरह की स्थिति में महिलाओं के साथ कभी -कभार ऐसा होना बहुत ही आम और स्वाभाविक हो सकता है, पर अगर यही एक महिला की रोजाना कि आदत बन जाए, तो यह वाकई माँ और बच्चे की सेहत के लिए काफी ज्यादा बुरा हो सकता है। दरअसल, यह माँ और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए एक चिंता का विषय बन सकता है। इसलिए, समस्या बढ़ने पर आपको एक बार अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गर्भावस्था के दौरान एक महिला का सही खानपान और हर परिस्थिति में खुश रहना माँ और बच्चे दोनों की सेहत के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं 

क्या प्रेगनेंसी के दौरान एक महिला के रोने से बच्चे की सेहत पर असर पड़ता है? 

दरअसल, गर्भावस्था के दौरान हर महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से उनकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर काफी ज्यादा असर पड़ता है। इसी के कारण हम में से ज्यादातर महिलाएं संवेदनशील, चिड़चिड़ी, तनावपूर्ण और काफी ज्यादा भावुक महसूस करती हैं। इस तरह की स्थिति में बहुत सी गर्भवती महिलाओं को बिना वजह रोना आ जाता है। आम तौर पर, इस दौरान महिलाओं का हल्का या फिर कभी-कभी रोना शरीर से तनाव कम करने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया हो सकती है, जिससे मां और बच्चे को किसी भी तरह का कोई भी नुकसान नहीं होता है। पर, इस तरह की स्थिति में जब एक महिला लगातार रोती रहती है, या फिर भावनात्मक तनाव में घिरी रहती है और डिप्रेशन जैसी समस्या से पीड़ित होती है, तो इससे वाकई एक गर्भवती महिला के पेट में पल रहे बच्चे की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इस दौरान, एक गर्भवती महिला के लगातार तनाव या फिर चिंता करने पर शरीर में कॉर्टिसोल नाम के एक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर काफी ज्यादा बढ़ जाता है, जो आम तौर पर, प्लेसेंटा के जरिये गर्भ में पल रहे बच्चे तक पहुंचता है और बच्चे की दिमागी और न्यूरोलॉजिकल स्थिति पर काफी ज्यादा बुरा असर डालता है। 

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1. काफी ज्यादा तनाव और चिंता बच्चे के वजन पर बुरा प्रभाव डालता है। 

2. ज्यादा तनाव और रोने से प्रीमैच्योर डिलीवरी हो सकती है

गर्भावस्था के दौरान महिलाएं खुश रहने के लिए क्या कर सकती हैं?

गर्भावस्था के दौरान महिलाएं अपने आप को खुश रखने के लिए निम्नलिखित उपायों को अपना सकती हैं, जैसे कि

1. भावनात्मक अस्थिरता महसूस होने पर, अपने पार्टनर, परिवार या फिर किसी अच्छे दोस्तों से अपनी सभी बातों को शेयर करें। 

2. इस दौरान, मन को शांति न मिलने पर योग और मेडिटेशन करें इससे मन काफी ज्यादा शांत रहता है और हार्मोनल संतुलन ठीक रहता है। 

3. इस दौरान स्वस्थ भोजन का सेवन करें, इससे न केवल शरीर और गर्भ में पलने वाले बच्चे की सेहत ठीक रहती है, बल्कि मूड भी काफी ज्यादा अच्छा रहता है। 

निष्कर्ष: गर्भावस्था के दौरान महिला का रोना एक आम बात हो सकती है, पर बार-बार और बिना बात के रोते रहना एक विचार करने वाली स्थिति हो सकती है। इसलिए, अगर गर्भावस्था के दौरान आपके साथ ऐसा बार- बार हो रहा है, तो आपको इसे आम समझ कर नाजज़रांदाज करने की बजाए तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि इससे माँ और गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, जरूरी है कि इस दौरान महिलाएं अपनी भावनाओं को काफी ज्यादा गंभीरता से लें, क्योंकि एक शांत, खुश और स्वस्थ महिला ही एक स्वस्थ बच्चे को सफलतापूर्वक जनम देती है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और गर्भावस्था के दौरान होने वाली किसी भी तरह की समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही सुमिता सोफत अस्पताल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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