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आखिर किन कारणों की वजह से गर्भावस्था में बढ़ने लगते हैं क्रैम्प्स? डॉक्टर से जानें, इन को कम करने के तरीकों के बारे में!

What are menstrual cramps? What are its symptoms and treatment options?

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गर्भावस्था के दौरान महिला को अपना अधिक से अधिक ख्याल रखने की काफी ज्यादा जरूरत होती है, क्योंकि इस दौरान वो एक जान नहीं, बल्कि दो जान होते हैं, जिसमें उसको अपना और अपने गर्भ में पल रहे बच्चा के पोषण से लेकर सभी चीजों की देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में, महिला को अनगिनत समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसमें शरीर में होने वाली हार्मोनल बड़वालों की वजह से उनको शारीरक और मानसिक दोनों रूप से कई तरह के बदलावों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में, महिला को एक तरफ ख़ुशी होती है, तो एक तरफ बदलती जीवनशैली के कारण कई दिक्क्तें भी होती हैं। कुल मिलाकर गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलावों को देखा जाता है, जिसका होना एक आम बात होती है। 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में होने वाले इन्हीं बदलावों की वजह से इस के बीच उन को रात के समय में क्रैम्प्स की समस्या भी बढ़ने लग जाती है, जिसमें पैरों में क्रैम्प्स यानी कि ऐंठन की समस्या को महसूस करना शामिल है। विशेष तौर पर, रात के दौरान होने वाली यह क्रेम्प्स की समस्या महिलाओं को दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर में हद से ज्यादा बढ़ने लग जाती है। आम तौर पर, कई मामलों में इस तरह की स्थिति में अचानक से गर्भवती महिलाओं की आँख खुल जाती है और इसके साथ ही पैरों की मांसपेशियों में तेजी से खिंचाव की समस्या महसूस होने लग जाती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि यह स्थिति महिलाओं को कम से कम कुछ सेकंड से लेकर कई मिनट तक काफी ज्यादा परेशान कर सकती है। इस दौरान घबराने की कोई जरूरत नहीं होती है, क्योंकि इस दौरान ऐसा होना आम बात होती है, पर अगर आपके यह समस्या कुछ वक्त तक के लिए नहीं, बल्कि लगातार बनी रहती है, तो ऐसे में आपको इसे आम समझ कर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि आपको तुरंत अपने डॉक्टर से इसके बारे में बात करनी चाहिए और तुरंत इसका इलाज करवाना चाहिए। क्योकि, इस दौरान कई समस्याएं बच्चे के स्वास्थ्य को भी बुरी तरीके से प्रभावित कर सकती हैं। इस लिए, इस दौरान हर मोड़ पर सावधान रहना अति आवश्यक होता है। 

आम तौर पर, महिलाओं में रात के दौरान होने वाली यह क्रेम्प्स की समस्या कई कारणों की वजह से बढ़ने लग जाती है, जिसमें ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव होना, शरीर में हार्मोनल बदलाव होना, शरीर में पानी की कमी होना, शरीर में विटामिन और पोषक तत्वों की कमी होना और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत होना जैसे कई कारण इस समस्या के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का वजन हद से ज्यादा बढ़ जाता है, जिसके कारण इसका दबाव पैरों की नसों और मांसपेशियों पर काफी ज्यादा बुरे तरीके से पड़ता है। इसी कारण के चलते रात के दौरान महिलाओं को क्रैम्प्स की समस्या हद से ज्यादा महसूस होने लगती है। दरअसल, जब दिनभर हमारा शरीर घूमता या फिर काम करता रहता है, तो इससे शरीर में काफी ज्यादा थकान भर जाती है और थकान के बाद जब हमारा शरीर आराम की स्थिति में आता है, तो ऐसे में मांसपेशियों में जकड़न और ऐंठन की समस्या और भी ज्यादा बढ़ती हुई महसूस हो सकती है। यदि समस्या आपको थोड़ी सी भी बढ़ती हुई नजर आती है, तो आप तुरंत अपने डॉक्टर से मिल सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

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गर्भावस्था में रात के दौरान बढ़ने वाले क्रेम्प्स के कारण!

दरअसल, डॉक्टर के अनुसार महिलाओं में रात के दौरान होने वाली क्रेम्प्स की समस्या कई कारणों की वजह से बढ़ सकती है, जिसमें से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. शरीर में हार्मोनल बदलाव होना 

दरअसल, यह तो आप सभी जानते ही होंगे, कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में हार्मोन के स्तर में काफी तेजी से बदलाव देखने को मिलते हैं। जिसके चलते इस समस्या में हार्मोनल बदलाव एक बहुत ही बड़ी भूमिका निभाते हैं। आम तौर पर, इसके कारण ही मसल्स और लिगामेंट्स काफी ज्यादा सेंसिटिव महसूस किये जा सकते हैं। आम तौर पर, कई गर्भवती महिलाओं को रात के दौरान अपने पैरों में भारीपन और जकड़न सी महसूस हो सकती है।

  1. शरीर में पानी की कमी होना 

इस तरह की स्थिति में शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी का होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि, हमारा आधा शरीर, शरीर में मौजूद पर्याप्त मात्रा में पानी के कारण ही चलता है। इसलिए, अगर इस दौरान शरीर में पानी की कमी पाई जाती है, तो वह इस दौरान शरीर में होने वाले क्रैम्प्स का कारण बन सकता है। आम तौर पर, अगर शरीर को रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी न दिया जाये, तो इसके कारण शरीर में कई तरह की समस्याएं हो सकती है। इसके कारण शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जिसके कारण मांसपेशियों में खिंचाव और ऐंठन की समस्या बढ़ती हुई महसूस हो सकती है। गर्मियों में तो यह समस्या महिलाओं को और भी ज्यादा परेशान कर सकती है, क्योंकि गर्म मौसम या फिर ज्यादा पसीना आने की स्थिति में शरीर में होने वाली पानी की कमी इस समस्या को और भी ज्यादा बढ़ावा दे सकती है। 

  1. ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव होना 
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इसमें किसी भी तरह का कोई शक नहीं है, कि गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव होने के साथ साथ रक्त संचार में भी काफी ज्यादा बदलाव देखने को मिल सकता है। आम तौर पर, गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय का बढ़ना निश्चित है और इसके कारण ही पैरों की नसों पर काफी ज्यादा दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से ब्लड फ्लो काफी ज्यादा बुरी तरीके से प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा, इसके कारण मांसपेशियों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है और पैरों में दर्द और ऐंठन की समस्या में बढ़ोतरी हो जाती है। 

  1. शरीर में विटामिन और पोषक तत्वों की कमी होना 

आम तौर पर, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को संतुलित और पोषण से भरपूर डाइट का सेवन करना माँ और बच्चे दोनों के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। अगर इस दौरान अपने खाने-पीने का ध्यान न रखा गया, तो इसके कारण शरीर में होने वाली कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स की कमी रात के दौरान क्रैम्प्स की समस्या को और भी ज्यादा बढ़ा सकती है। आम तौर पर, इलेक्ट्रोलाइट्स मसल्स के ठीक से काम करने के लिए यह मिनरल्स बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दरअसल इस तरह की स्थिति में जब महिला के शरीर में इन की कमी पाई जाती है, तो ऐसे में महिलाओं की मांसपेशियों में काफी जल्दी सिकुड़न आने लग जाती है, जिसके कारण दर्द की समस्या पैदा होने लग जाती है। 

गर्भावस्था के दौरान क्रैम्प्स को कम करने के लिए किन तरीकों को अपनाया जा सकता है? 

आम तौर पर, डॉक्टर के अनुसार गर्भावस्था के दौरान क्रैम्प्स की समस्या को कम करने के लिए निम्नलिखित तरीकों को अपनाया जा सकता है, जैसे कि 

  1. दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें। 
  2. रात के दौरान नींद लेने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जरूर करें। 
  3. रोजाना अपनी डाइट में केवल संतुलित आहार को ही शामिल करें। 
  4. रोजाना हल्की वॉक और नियमित व्यायाम करें। 
  5. सोने की सही स्थिति को अपनाएं। 
  6. सोते वक्त पैरों के नीचे तकिया लगाकर सोएं। 
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निष्कर्ष: प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को कई तरह के हार्मोनल बदलावों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उनको मानसिक और शारीरिक तौर पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में, प्रेगनेंसी के दौरान कई महिलाओं को रात के दौरान काफी ज्यादा क्रैम्प्स की समस्या का अभाव होता है, जिसमें वह काफी ज्यादा दर्द का अनुभव करती हैं। इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण जिम्मेदार होते हैं, जैसा कि आपको इस लेख के माध्यम से बताया गया है। अगर इस तरह की स्थिति में आपको दर्द हद से ज्यादा महसूस होता है और इसके साथ साथ पैरों में सूजन, लालिमा और गर्माहट की समस्या का भी अहसास होता है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करने की जरूरत होती है। अगर वक्त रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाये, तो इस दौरान यह किसी गंभीर ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्या का भी संकेत हो सकता है। स्थिति और ज्यादा गंभीर न हो इससे पहले आपको तुरंत इस समस्या की जांच और समय पर इलाज करवाना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इससे न केवल माँ को बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके बारे में और ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और गर्भावस्था से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही सुमीता सोफत अस्पताल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. गर्भावस्था के दौरान कौन सी समस्याएं बच्चे को अधिक प्रभावित करती हैं? 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गर्भावस्था के दौरान ऐसी कई समस्याएं हैं, जो गर्भ में पल रहे बच्चों को काफी ज्यादा प्रभावित कर सकती हैं। इसमें उच्च रक्तचाप की समस्या होना, बेकाबू मधुमेह की समस्या होना, संक्रमण और थायराइड की समस्या गर्भ में पल रहे बच्चों को हद से ज्यादा परेशान कर सकती हैं। 

प्रश्न 2. क्या बच्चा गर्भावस्था की शुरुआत में ही हलचल करने लग जाता है? 

नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। गर्भावस्था की बिल्कुल शुरुआत में बच्चा हलचल करना शुरू नहीं करता है। हालांकि, गर्भावस्था के 10 से 12 सप्ताह के आसपास बच्चे की हल्की हरकतें शुरू हो जाती हैं, पर इसके बारे में गर्भवती महिला को अहसास नहीं हो पाता है। 

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