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दरअसल, महिलाओं को गर्भधारण करने के लिए कई तरह के पड़ावों और कई तरह की समस्याओँ से भी गुजरना पड़ता है। ऐसे में, महिला को कई तरह की बातों का ध्यान रखने की काफी ज्यादा जरूरत होती है और गर्भधारण करते वक्त तो अपनी विशेष देखभाल करने की काफी ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे में, अगर कोई भी दिक्कत आ जाये, तो गर्भधारण करने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इन्ही परेशानियों में से एक है ANA रिपोर्ट पॉजिटिव आना। यह एक महिला को हैरान और परेशान दोनों कर देने वाली स्थिति हो सकती है। ऐसे में, अपने आप को ठीक रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में, बहुत से लोग जानना चाहते हैं, कि आखिर ANA पॉजिटिव आना क्या होता है?
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि एंटी न्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट, जिसको आम भाषा में एएनए के नाम से जाना जाता है। दरअसल, यह एक प्रकार का ब्लड टेस्ट है, जिस को लगभग सभी महिलाओं को करवाना चाहिए। आम तौर पर, ज्यादातर एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट यह पता करने के लिए किया जाता है, कि कहीं शरीर की एंटीबॉडीज अपने ही सेल्स के खिलाफ तो नहीं काम कर रहे। मतलब, कि कहीं शरीर का इम्यून सिस्टम अपने ही सेहतमंद सेल्स का नुकसान तो नहीं कर रहा है? दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि एक व्यक्ति के शरीर की एंटीबॉडीज का काम किसी भी तरह की इंफेक्शन से लड़कर और उसे रोककर शरीर को स्वस्थ रखना होता है। पर, जब यह एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट किसी भी महिला के शरीर में पॉजिटिव पाया जाता है, तो इस तरह की स्थिति में, उस महिला का इम्यून सिस्टम उसके ही सेहतमंद सेल्स को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा होता है। हालांकि, इस तरह की स्थिति हर वक्त तो नहीं बनी रहती, पर किसी विशेष स्थिति में यह जरूर हो सकता है।
आम तौर पर, जब किसी महिला का ANA टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो ऐसे में उस महिला का बार-बार गर्भपात होने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। मतलब कि उस महिला का मिसकैरेज होना निश्चित है। क्योंकि, इस तरह की स्थिति में, जब कोई भी महिला गर्भधारण करने की कोशिश करती है, तो ऐसे में उसका इम्यून सिस्टम शरीर में दौड़ रहे खून को गाढ़ा कर देता है, जिसकी वजह से शरीर में न केवल क्लॉट बनने शुरू हो जाते हैं, बल्कि प्लेसेंटा तक सही मात्रा में खून भी नहीं पहुंच पाता है और गर्भपात होने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। पर, अगर जो महिला ANA पॉजिटिव होती है और वो गर्भधारण करने की कोशिश नहीं कर रही है, तो ऐसे में उस को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हो सकती है। इसके कई लक्षण देखने को भी मिल सकते हैं। गंभीर समस्या होने पर और ऐसे में गर्भधारण करने की कोशिश करने पर आपको एक बार अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
ANA पॉजिटिव आने वाली महिलाओं को कौन से लक्षण महसूस हो सकते हैं?
आम तौर पर, ANA पॉजिटिव आने वाली महिलाओं को निम्नलिखित कई लक्षणों का अनुभव हो सकता है, जैसे कि
1. लगातार हड्डियों और जोड़ों में दर्द होना
2. हर वक्त बिना कुछ करे थकान महसूस होना।
3. कुछ भी नया काम या चीज इस्तेमाल करने से पहले चिड़चिड़ाहट महसूस होना।
4. त्वचा में काफी ज्यादा रैशेज हो जाना।
5. काफी ज्यादा बुखार होना।
6. बालों के झड़ने की समस्या होना।
ANA पॉजिटिव वाली महिलाएं प्रेगनेंसी कैसे प्लान कर सकती हैं?
दरअसल, इस तरह की स्थिति में अगर आपके एक से ज्यादा गर्भपात हुए हैं और आपको इसका कारण नहीं पता चल पाया है, तो आपको इसके लिए अपना एंटी न्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट जरूर कराना चाहिए। अगर आपकी रिपोर्ट में ANA पॉजिटिव आता है, तो बेशक आपके गर्भपात का यही कारण हो सकता है। अगर आप ऐसे में गर्भधारण करना चाहती हैं, तो इसके लिए आपको अपनी देखभाल विशेष रखनी होगी। ऐसे में, आपको अपने पीरियड साइकिल का रिकॉर्ड रखना होगा, अगर ऐसा नहीं होता है, तो प्रेगनेंसी को बचा पाना काफी कठिन साबित हो सकता है।
ऐसा इसलिए भी होता है, क्योंकि जब पॉजिटिव एएनए वाली महिलाओं का गर्भधारण हो जाता है, तो उसको उसी वक्त ब्लड थिनर के इंजेक्शन लगने शुरू हो जाते हैं। अगर इंजेक्शन देने में किसी भी तरह की कोई भी देरी होती है, तो शरीर का इम्यून सिस्टम अपने ही सेहतमंद सेल्स के खिलाफ काम करने लग जाता है, जिससे कि खून काफी ज्यादा गाढ़ा हो जाता है और बच्चे तक खून नहीं पहुंच पाता है और गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
निष्कर्ष: माँ बनना हर महिला का सामना होता है और उसे पूरा होने में समस्या आना किसी बड़ी तकलीफ से कम नहीं होता है। इसमें कोई शक नहीं है, कि बच्चा पैदा करने से पहले और बाद में महिला को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण महिलाओं के सुभाव में काफी ज्यादा बदलाव आता है और वह चिड़चिड़ी सी हो जाती हैं। इसके पीछे शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी हो सकते हैं। इस लेख में आपको ANA पॉजिटिव क्या होता है और इससे पॉजिटिव महिलाओं में दिखने वाले लक्षणों के बारे में बताया गया है। इसके कारण महिलाओं का गर्भपात हो सकता है और गर्भधारण करने में कई दिक्कतें भी आ सकती हैं, इसलिए समय पर ध्यान देकर इलाज करवाना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आशा है, कि समस्या पता चलते ही, अगर डॉक्टर की निगरानी में चला जाये, तो समस्या को काटा जा सकता है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतनी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और गर्भावस्था से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही सुमिता सोफत अस्पताल में जाकर आपकी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. क्या छोटी उम्र में भी बल्की यूटेरस की समस्या परेशान कर सकती है?
हाँ, यह समस्या महिलाओं को छोटी उम्र में भी परेशान कर सकती है, जिसमें महिलाओं की उम्र 20 से 30 साल की हो सकती है। हालांकि, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस तरह की स्थिति ज्यादातर 30 से 50 साल उम्र की महिलाओं में काफी ज्यादा देखी जा सकती है। पर, आज यह समस्या हार्मोनल असंतुलन या फिर अन्य कारणों की वजह से कम उम्र की लड़कियों पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
प्रश्न 2. क्या ANA पॉजिटिव आने पर प्रेगनेंसी प्लान की जा सकती है?
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हम में से ज्यादातर महिलाएं यह जानकर काफी ज्यादा परेशान हो जाती हैं, कि उनका ANA पॉजिटिव आया है और वह अब प्रेगनेंसी प्लान नहीं कर सकती हैं। पर, आपको बता दें, कि ऐसा बिलकुल भी नहीं है, हां, ANA पॉजिटिव आने के बाद भी महिलाएं प्रेगनेंसी प्लान कर सकती हैं, पर इसके लिए ख़ास देखभाल और नियमित डॉक्टर की सलाह लेना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
प्रश्न 3. क्या ANA पॉजिटिव आना महिलाओं में आम होता है?
दरअसल, हाँ ANA पॉजिटिव आना महिलाओं में आम हो सकता है। दरअसल, सेहतमंद महिलाओं में ANA टेस्ट का पॉजिटिव आना कोई विशेष बात नहीं होती है, यह महिलाओं में काफी आम हो सकता है।
प्रश्न 4. किन कारणों की वजह से महिलाओं में मिसकैरेज होने की समस्या होती है?
दरअसल, ऐसे कई कारणों की वजह से महिलाओं में मिसकैरेज हो सकता है, जिसमें भ्रूण में क्रोमोसोमल असामान्यताएं होना, गर्भाशय की बनावट में खराबी होना, हार्मोनल असंतुलन होना, इंफेक्शन, मां की उम्र या फिर अनियंत्रित बीमारियां होना शामिल होता है।