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दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गर्भावस्था के लक्षण नज़र आते ही बहुत सी महिलाएं जांच करने के लिए घर पर ही अपना गर्भावस्था का टेस्ट कर लेती हैं, जिस को एचसीजी हार्मोन टेस्ट कहा जाता है। आम तौर पर, जिन महिलाओं की एचसीजी रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है, दरअसल उसके बाद गर्भवती महिला के ब्लड सैंपल की जांच एक मेडिकल लैब में की जाती है और इस टेस्ट को बीटा एचसीजी टेस्ट के नाम से जाना जाता है। बता दें, कि होम प्रेगनेंसी किट और बीटा-एचसीजी टेस्ट का इस्तेमाल एचसीजी हार्मोन का लेवल निर्धारित करने के लिए किया जाता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि एचसीजी जिसे ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन कहा जाता है, जो एक इस तरह का हार्मोन होता है, जिसका सीधा संबंध गर्भावस्था में भ्रूण के विकास से होता है। आम तौर पर, इसका निर्माण प्लेसेंटा के माध्यम से किया जाता है। दरअसल, शरीर में इन हार्मोन का निर्माण गर्भावस्था के दौरान होता है, जो दरअसल फीटस के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका को निभाते हैं।
आम तौर पर, प्रेगनेंसी टेस्ट करते वक्त प्रेगनेंसी को कंफर्म करने के लिए और साथ में एक महिला की प्रेगनेंसी को बढ़ावा देने के लिए एचसीजी हार्मोन का योगदान बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में, एचसीजी हार्मोन की अहमियत प्रेगनेंसी में काफी ज्यादा होती है, क्योंकि यह गर्भावस्था को कन्फर्म करने के साथ- साथ गर्भावस्था के पहले 8 से 10 हफ्तों में भ्रूण की प्रगति, प्लेसेंटा को बनाने और साथ में प्रेगनेंसी को बना कर रखने के लिए बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है।
इसके अलावा, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हाई लेवल एचसीजी एक से कई ज्यादा भ्रूण की मौजूदगी के बारे में पता करने का ही एक तरीका होता है। दरअसल, जब एचसीजी का स्तर काफी ज्यादा होता है, तो इसका मतलब यही होता है, कि एक महिला के गर्भ में दो या फिर इससे ज्यादा बच्चे पल रहे हैं। हाई एचसीजी स्तर के माध्यम से ही मोलर प्रेगनेंसी के रिस्क के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। दरअसल, मोलर प्रेगनेंसी एक इस तरह की स्थिति होती है, जिस में एक महिला गर्भवती तो बिल्कुल भी नहीं होती है, पर उसमें भ्रूण के आकार का एक ट्यूमर जरूर बनने लगता है। हालांकि, किडनी कैंसर, लंग कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं के दौरान भी एचसीजी लेवल काफी ज्यादा होता है। इसके साथ ही, लो लेवल एचसीजी की वजह से मिसकैरेज या फिर गर्भपात का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ जाता है। इस के इलावा, लो लेवल एचसीजी की वजह न केवल एक्टोपिक गर्भवस्था का खतरा बढ़ सकता है, बल्कि इस की वजह से भ्रूण की प्रगति से जुडी गड़बड़ियों के खतरा में भी काफी ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
हाई एचसीजी लेवल और लो एचसीजी लेवल का क्या अर्थ होता है?
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गर्भावस्था के पहले 8 से 11 दिनों में ही एचसीजी हार्मोन के लो लेवल का पता लगाया किया जा सकता है। जबकि गर्भावस्था के पहले तीन महीनों के अंत में एचसीजी हार्मोन के स्तर में काफी ज्यादा बढ़ोतरी देखी जाती है। आप की जानकारी के लिए आपको बता दें, कि जैसे- जैसे एक महिला की प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है, तो वैसे- वैसे ही एचसीजी का लेवल काफी ज्यादा कम होने लग जाता है। दरअसल, गर्भवती महिलाओं में एचसीजी का लेवल इस प्रकार से हो सकता है, जैसे कि
1. इस तरह की स्थिति में,10 से 25 U/L का लेवल लो- लेवल प्रेग्नेंसी को दिखाता है।
2. इस दौरान 25 U/L या फिर इस से कई ज़्यादा होने पर प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव दिखाई दे सकता है, जिस में महिला गर्भवती होती है।
3. हालांकि, इस तरह की स्थिति के दौरान एक महिला के पीरियड मिस होने के कम से कम 7वें हफ्ते के बाद टेस्ट करने पर एचसीजी लेवल 200 से 32,00 U/L तक हो सकता है।
प्रेगनेंसी में एचसीजी हार्मोन क्यों अहम होता है?
आम तौर पर, एचसीजी हार्मोन एक महिला की गर्भावस्था के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह स्पर्म और एग के निषेचन के बाद गर्भनाल के माध्यम से बनाया जाता है। इसके साथ ही, यह गर्भावस्था की शुरुआत में 8 से 11 हफ्तों के दौरान भ्रूण की प्रगति करने, प्रोजेस्टेरोन के लेवल को बना कर रखने और साथ में एक महिला के गर्भ की सुरक्षा के लिए भी काफी हद तक जिम्मेदार होता है। इसके अलावा, यह एक महिला की गर्भावस्था को कन्फर्म करने वाला एक विशेष कारक भी होता है।
निष्कर्ष: प्रेगनेंसी टेस्ट करते वक्त प्रेगनेंसी को कंफर्म करने के लिए और साथ में एक महिला की प्रेगनेंसी को बढ़ावा देने के लिए एचसीजी हार्मोन का योगदान बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इस लिए, एचसीजी हार्मोन की अहमियत प्रेगनेंसी में काफी ज्यादा होती है। इस लेख के माध्यम से हमने आपको हाई और लो लेवल एचसीजी के बारे में बताया है, जिसकी अहमियत गर्भावस्था के दौरान काफी ज्यादा होती है। इसके अलावा, एचसीजी हार्मोन एक महिला की गर्भावस्था के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की कोई भी गंभीर समस्या होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से सम्पर्क कर सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और गर्भावस्था से जूसी किसी भी तरह की समस्या का समाधान करने के लिए आप आज ही सुमीता सोफत अस्पताल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इस के विशेषज्ञों से इस के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।