Book Appointment

एज़ूस्पर्मिया क्या होता है, इसके मुख्य लक्षण, कारण और कैसे करें इलाज ?

एज़ूस्पर्मिया क्या होता है, इसके मुख्य लक्षण, कारण और कैसे करें इलाज ?

Loading

पुरुषों के वीर्य में शुक्राणु के संख्या का बहुत ही कम मात्रा में मौजूद होने की समस्या को अशुक्राणुता, निल शुक्राणु या फिर एज़ूस्पर्मिया के नाम से जाना जाता है | निल शुक्राणु होने का संबंध पुरुष के वन्ध्यत्व के साथ होता है | लेकिन इसमें कोई डरने की बात नहीं होती है, आज के दौर में विज्ञान में इतनी प्रगति आ गयी है की निल शुक्राणु की समस्या का भी अब आधुनिक तकनीकों के ज़रिये आसानी से इलाज किया जा सकता है | 

पुरुषों के वीर्य में मौजूद निल शुक्राणु की स्थिति एज़ूस्पर्मिया की समस्या को दर्शाती है |  निल शुक्राणु होने का सीधा संबंध पुरुष के वन्ध्यत्व के साथ होता है, क्योंकि कंसीव करने के लिए स्पर्म से ओवयूम का निषेचित होना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होता है और जब पुरुष एजेक्युलेट करता है, यदि उस दौरान सीमेन में जीरो शुक्राणु मौजूद होते है तो इससे दंपति को गर्भधारण करने में मुश्किल होती है | प्री-टेस्क्युलर, टेस्क्युलर और पोस्ट टेस्क्युलर के बाद ही एज़ूस्पर्मिया की समस्या उत्पन्न होती है | लेकिन एज़ूस्पर्मिया का आसानी से इलाज किया जा सकता है | यदि आप में कोई भी व्यक्ति एज़ूस्पर्मिया की समस्या से परेशान है और कंसीव करने में परेशानी हो रही है तो इलाज के लिए आप द सोफत इनफर्टिलिटी एंड वुमन केयर सेंटर से डॉक्टर सुमिता सोफत से परामर्श कर सकते है | आइये जानते है एज़ूस्पर्मिया क्या होता है :- 

See also  15वीं इंडियन फ़ट्रिलिटी सोसायटी की एनुअल कॉन्फ्रेन्स फ्रटिवीजन 2019: डॉ. सुमिता सोफत

एज़ूस्पर्मिया क्या होता है ? 

एज़ूस्पर्मिया एक ऐसी चिकित्सा स्थिति होती है, जिसमें एक पुरुष के वीर्य में शुक्राणु बिलकुल भी मौजूद नहीं होते है | आज के दौर में लगभग 20 प्रतिशत पुरुष एज़ूस्पर्मिया होने की वजह से बांझपन जैसी समस्या से गुजर रहे है |  एज़ूस्पर्मिया का मतलब है वीर्य में मौजूद शुक्राणु का जीरो काउंट और नील होना | आइये जानते है पुरुषों में शुक्राणु कैसे उत्पन्न होते है :-     

शुक्राणु कैसे होते है उत्पन्न ? 

अब अगर एक मानव की संरचना देखी जाये तो पुरुष के स्क्रोटम में दो टेस्टीज़ मौजूद होते है, जहां स्पर्म का उत्पादन होता  है | जब कोई पुरुष अपने यौन रूप से परिपकव हो जाता है तो उस दौरान स्पर्म का उत्पादन शुरू होता है | इस उम्र के बाद से ही करोड़ों की संख्या में शुक्राणु का उत्पादन होता रहता है | यह स्पर्म उत्पादन पुरुषों को प्रजनन क्षमता प्रदान करने में मदद करता है | बहुत से लोग ऐसे भी होते है जिनमें आजीवन स्पर्म का उत्पादन होता रहता है | स्पर्म के उत्पादन होने के बाद एक नलिका से सारे स्पर्म को सेमिनल वेसिकल्स में ट्रांसफर कर दिए जाते है | इस नलिका को व्हास डिफ़रेंस के नाम से भी जाना जाता है | 

एज़ूस्पर्मिया होने के मुख्य लक्षण क्या है ?      

See also  आईवीएफ उपचार में क्या-क्या शामिल है और आईवीएफ का खर्च कितना होता है? 

एज़ूस्पर्मिया यानि शुक्राणु न होना के आमतौर पर कोई ध्यान देने वाले लक्षण नहीं होते | अधिकतर लोगों में एज़ूस्पर्मिया होने के लक्षण कुछ खास दिखायी नहीं देते, तो कुछ लोगों इससे जुड़े लक्षण दिखाई दे सकते है, जो निम्नलिखित है :- 

  • सेक्स करने की इच्छा न होना या फिर कामेच्छा की कमी होना | 
  • अंडकोष में सूजन या फिर दर्द होना |
  • अंडकोष के आकार का छोटा होने या फिर सख्त होना 
  • स्खलन में कठिनाई या फिर बिलकुल न होना | 
  • प्रतिगामी स्खलन, जहाँ वीर्य स्खलित होने के बजाए मूत्राशय में प्रवेश कर जाते है |   

एज़ूस्पर्मिया होने के मुख्य कारण क्या है ?      

एज़ूस्पर्मिया होने के मुख्य कारण निम्नलिखित है :- 

  • अनुवांशिक स्थितियां का होना यानी क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम 
  • मनोचिकित्सक उपचार होने जैसे की कीमोथेरेपी या फिर विकिकरण 
  • मनोरंजन दवाओं का सेवन और नशीले पदार्थ का लगातार सेवन 
  • शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी असमानताएं होना जैसे कि वैरीकोसेल या फिर वास डिफरेंस होना  
  • प्रजनन के पथ में रुकावट होने 
  • हार्मोनल से जुड़ी असमानताएं 
  • स्खलन से जुड़ी समस्या 
  • वृषण संरचना से जुड़ी समस्याएं
  • ख़राब खानपान होना  
  • पिट्यूटरी ट्यूमर होना आदि 

एज़ूस्पर्मिया होने की सटीक कारण हमेशा पता नहीं चल पाते है, क्योंकि कई बार यह समस्या उन कारकों की वजह से उत्पन्न होता है, जिन्हे पूरी तरह से समझा नहीं जा सकता |      

See also  डॉ. सुमिता सोफत: इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बढ़ा सकते है बांझपन का खतरा

एज़ूस्पर्मिया से जुड़े कुछ ज़रूरी बातें

  • यह सभी वर्ग के पुरुषों और पृष्ठभूमि को यह समस्या प्रभावित कर सकती है | 
  • यह उन पुरुषों में होना सबसे आम है जो पहले से ही बांझपन की समस्या से गुजर रहे होते है | 
  • कुछ तरीकों के ज़रिये इस समस्या का इलाज आसानी से किया जा सकता है, लेकिन हर बार उपचार इतना आसान नहीं होता | 

एज़ूस्पर्मिया का कैसे किया जाता है इलाज ?   
एज़ूस्पर्मिया के कुछ मामलों में माइक्रोसर्जिकल का उपयोग करके, उसे ठीक किया जा सकता है इसके अलावा इस समस्या को अवरुद्ध वास या फिर वैरीकोसेल के ऑपरेशन के ज़रिये इससे ठीक करने की कोशिश भी की जाती है | एक्सपर्ट्स का मानना है की एज़ूस्पर्मिया की समस्या को सर्जरी के माध्यम से ठीक किया जा सकता है, जिसका बाद मरीज़ प्राकृति रूप से गर्भधान कर सकते है | 
डॉक्टर सुमिता सोफत पंजाब के सवर्श्रेष्ठ इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट स्पेशलिस्ट में से एक है, जो पिछले 25 वर्षों से पीड़ित मरीज़ों का स्थायी रूप से इलाज कर, गर्भधारण करने में उनकी सहायता कर रही है | इसलिए आज ही द सोफत इनफर्टिलिटी एंड वुमन केयर सेंटर के ऑफिसियल वेबसाइट पर जाएं और परामर्श के लिए अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें | इसके अलावा आप वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से सीधा संपर्क कर अपनी अप्पोइन्मेंट की बुकिंग करवा सकते है

Contact Us


    Our Recent Posts