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आपको बता दें, कि आईवीएफ एक इस तरह की प्रक्रिया है, जिस में, आम तौर पर एक व्यक्ति के अंडाशय से अंडों को निकाल लिया जाता है और फिर उनको शरीर के बाहर शुक्राणुओं के साथ मिलाया जाता है। दरअसल, इस तरीके से बने एम्ब्रियो को एक महिला के गर्भाशय में इम्प्लांट किया जाता है और कंसीव किया जाता है। आम तौर पर, वर्तमान में, दवा के प्रकार और खुराक के आधार पर अलग-अलग आईवीएफ प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। आपको बता दें, कि आईवीएफ दो प्रकार का होता है, पहला प्राकृतिक आईवीएफ और दूसरा पारंपरिक आईवीएफ। आम तौर पर, इन दोनों प्रक्रिया के अपने फायदे और नुकसान शामिल होते हैं। तो आज हम इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से प्राकृतिक आईवीएफ के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे और जानेंगे कि इसके क्या फायदे हो सकते हैं।
प्राकृतिक आईवीएफ चक्र क्या होता है?
असल में, प्राकृतिक चक्र आईवीएफ को दवा-मुक्त आईवीएफ के नाम से भी जाना जाता है। इसका मतलब यह होता है, कि नेचुरल आईवीएफ में फॉलिकल्स के विकास को उत्तेजित करने के लिए किसी भी तरह की दवा का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और इसके साथ ही प्रमुख फॉलिकल के प्राकृतिक चुनाव का पालन किया जाता है। आम तौर पर, बहुत सारे मरीजों के लिए पारंपरिक आईवीएफ बहुत ज्यादा जरूरी होता है। दरअसल, पारंपरिक आईवीएफ में गर्भवती होने की संभावना को ज्यादा करने के लिए, इस दौरान बहुत सारे अंडों को प्राप्त किया जाता है और बहुत सारे भ्रूण को बनाने के लिए दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। आपको बता दें, कि इसके उल्ट प्राकृतिक चक्र आईवीएफ में, किसी भी तरह की कोई उत्तेजना वाली दवाओं का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। आम तौर पर, इस तरह की प्रक्रिया में स्वाभाविक रूप से एक महिला का शरीर सबसे अच्छे और बेहतर अण्डों का चुनाव करता है और इसके साथ ही अंडा परिपक्व होने के बाद, एक महिला के चक्र के दसवें दिन के आसपास, अंडे को निकाल लिया जाता है।
अंडा संग्रह (अण्डों को इकट्ठा करना) एक सीधी प्रक्रिया है। आम तौर पर, इस तरह की प्रक्रिया में सिर्फ एक फॉलिकल से अंडे को निकालने के लिए 5 मिनट से भी कम समय लगता है। इस तरह की स्थिति में बहुत सारे मरीज इस तरह के होते हैं, जो बिना किसी बेहोशी या फिर दर्द की दवा के इस प्रक्रिया को पूरा कर लेते हैं और वह उसी दिन अपने काम पर वापस लौट सकते हैं।
अंडा संग्रह (अण्डों को इकट्ठा करना) के बाद, डॉक्टर आधुनिक लैब तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं और साथ ही आपके साथी या फिर डोनर के स्पर्म के साथ अंडे को फर्टिलाइज़ करते हैं। आपको बता दें, कि दो से तीन दिन बाद, भ्रूण ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान एक भ्रूण को बच्चेदानी में तब्दील किया जा सकता है।
आपको बता दें, कि इसके दो हफ्ते पूरे हो जाने के बाद, डॉक्टर गर्भ अवस्था की पुरे तरीके से जांच करते हैं। आम तौर पर, यह पूरी प्रक्रिया आपके मासिक धर्म चक्र के आधार पर होती है और इस प्रक्रिया में कम से कम 10 से 14 दिनों तक का समय लगता है। इस तरह की स्थिति में आपको किसी भी तरह की कोई भी दवा या फिर बहुत ही कम दवा का इस्तेमाल करना पड़ता है और इसके साथ ही एक से ज्यादा गर्भधारण की सम्भावना भी काफी ज्यादा कम होती है। आपको बता दें, कि इस तरह की स्थिति में बहुत सारी महिलाएं अंडकोष उत्तेजना के साथ जुड़ी तकनीकी लागतों और साथ में परेशानियों को कम करने के लिए प्राकृतिक चक्र आईवीएफ का चुनाव करती हैं।
प्राकृतिक चक्र आईवीएफ के लाभ
आम तौर पर, प्राकृतिक चक्र आईवीएफ के कई फायदे होते है, जिसमें शामिल हैं, जैसे कि
1. इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की कोई या फिर बहुत कम ओवेरियन स्टिमुलेशन दवा नहीं होती है।
2. दरअसल, बहुत सारे लोग इसको कम तनावपूर्ण मानते हैं।
3. बाकियो से कम महंगा होता है।
4. इसको लगातार चक्रों के साथ दोहराया जा सकता है
5. इस प्राकृतिक चक्र आईवीएफ में ओवेरियन हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम का किसी भी तरह कोई खतरा नहीं होता है।
निष्कर्ष
प्राकृतिक चक्र आईवीएफ में फॉलिकल्स के विकास को उत्तेजित करने के लिए किसी भी तरह की दवा का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और प्रमुख फॉलिकल के प्राकृतिक चुनाव का पालन किया जाता है। प्राकृतिक चक्र आईवीएफ में एक व्यक्ति को कई तरह लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे कि यह प्रक्रिया बाकियो से कम महंगी होती है और इसको लगातार चक्रों के साथ दोहराया जा सकता है आदि। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर आप भी प्राकृतिक आईवीएफ को करवाना चाहते हैं, तो आप आज ही सुमिता सोफत अस्पताल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।




