महिलाओं में बाँझपन की समस्या

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बांझपन की समस्या महिला और पुरष दोनों में होती है | निश्चित रूप से यौन सम्भोग के बाद भी जब महिला गर्भवती नहीं होती तो वह या उसका पति बांझपन की समस्या से पीड़ित है | महिलों में बाँझपन की समस्या आने के कई कारन हो सकते हैं ,

महिलाओं में बाँझपन के कारन

फैलोपियन टियूब का बंद होना या खराब हो जाना , जिसकी वजह से अंडे अंडकोष से बच्चे दानी में नहीं पहुंच पते और महिला माँ बनने के काबिल नहीं रहती|

महिला की रोजाना की जिंदगी में कोई बहुत बड़ा मानसिक दवाब होना भी गर्भधारण में रुकावट पैदा कर सकता है |

महिला के पति के शक्राणु की गुणवत्ता खराब होने के कारन भी महिला गर्भधारण नहीं कर सकती | आगे वीर्य में शक्राणु की गिनती २०००० से काम है तो महिला गर्भ धारण नहीं अकर४ पायेगी |

महिलाओं में बाँझपन के लक्षण

मासिक धरम आने की तरीखों में फेरदबल होना | यह भी एक सटीक लक्ष्यम होता है की महिला के गर्भधरण में कोई रुकावट है |

मासिक धरम के समय बहुत जायदा या बहुत कम खून बहने लगे तो समझ लेना किये की आपको गर्भधरण ने मुश्किल आने वाली है |

मासिक धरम के समय शरीर में बहुत जायदा दर्द होने लगता है | यह भी बांझपन की समस्या का एक लक्षण है |इस विषय में चिक्त्सिक से विचार विमर्श कर लेना चाहिए |

बांझपन के इलाज के लिए बहुत साडी टेक्नीक्स आजकल चल रही है , जिनसे बाँझपन का सटीक इलाज करवाया जा सकता है | आईवीऍफ़ जो की एक कारगर तकनीक है , इससे बांझपन से पीड़ित महिला भी माँ बन सकती है | अगर महिला की फेलोपियन टियूब में कोई खराबी है , जिसकी वजह से महिला के अंडकोष से अंडे बच्चेदानी तक नहीं पहुंच रहे , तो उस महिला को आईवीऍफ़ तकनीक से गर्भधरण करवाया जा सकता है |

इस तकनीक में बाहर से भ्रूण तैयार करके महिला की बच्चेदानी में रखा जाता है , जिससे महिला गर्भवती होती है |

बाँझपन की समस्या के हल के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की जरूरत है | अगर आप मानसिक तनाव रहित और एक स्वस्थ जीवन जीते है तो आपको यह समस्या नहीं आ सकती |

बाँझपन को दूर करने के लिए स्वास्थ्य आदतें , रोजाना कसरत , शराब और धूपरपन से दुरी और सही यौन इतिहास कहना बहुत जरूरी है |

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