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दरअसल, हर महिला के लिए गर्भधारण करना आसान नहीं होता है, क्योंकि इस दौरान महिलाओं को मानसिक और शारीरिक तौर पर कई तरह के बदलावों का सामना करना पड़ता है, जिससे वह काफी ज्यादा परेशान और तनाव में रहने लग जाती है। तनाव जो कि उनकी सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को तनाव लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इस तरह की स्थिति में लिया गया तनाव माँ और बच्चे दोनों की सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। यहां तक कि वैज्ञानिकों का भी इस पर यही कहना है, कि लिया गया काफी ज्यादा तनाव गर्भ में पल रहे बच्चे की शारीरिक सेहत के साथ साथ मानसिक सेहत को भी बुरी तरीके से प्रभावित कर सकता है। असल में, तनाव माँ और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गर्भावस्था के दौरान जो महिलाएं तनाव लेती हैं, या फिर तनाव जैसी स्थिति में ही रहती हैं, दरअसल इसकी वजह से न केवल उनका ब्लड प्रेशर हाई होता है, बल्कि इससे गर्भ में पल रहे बच्चे में आयरन की कमी भी काफी ज्यादा हो जाती है। यह सब जानने के बाद बहुत सी महिअलों के मन में यह सवाल आता है, कि क्या गर्भावस्था के दौरान लिया गया तनाव प्रीमैच्योर डिलीवरी का कारण भी बन सकता है? तो इस सवाल का जवाब है हां, तनाव के कारण समय पूर्व प्रसव यानी कि प्रीमेच्योर डिलीवरी का जोखिम भी काफी ज्यादा बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान तनाव लेने से बचना चाहिए और गंभीर स्थिति होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
ज्यादातर महिलाएं तनाव से ही घिरी रहती हैं
दरअसल, इस पर डॉक्टर का भी यही कहना है, कि गर्भावस्था के दौरान जो महिलाएं काफी ज्यादा तनाव लेती हैं, इससे उनकी सेहत के साथ साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत भी बुरी तरीके से प्रभावित हो जाती है। तनाव माँ और बच्चे दोनों के लिए बहुत ही ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। आज के समय में ज्यादातर महिलाएं बाहर काम करती है और ज्यादा काम या फिर टारगेट अचीव करने की वजह से ज्यादा तनाव लेने लग जाती हैं। तनाव सिर्फ काम करने वाली महिलाओं को ही नहीं, बल्कि घर में रहने वाली महिलाओं को भी तनाव परेशान कर सकता है।
गर्भावस्था के दौरान तनाव के क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं?
दरअसल, गर्भावस्था के दौरान तनाव के बहुत से गंभीर परिणाम मिल हो सकते हैं, जिसमें निम्नलिखित नुकसान शामिल हो सकते हैं, जैसे कि
1. तनाव के कारण मां का ब्लड प्रेशर नॉर्मल से कहीं ज्यादा हो सकता है।
2. इसकी वजह से गर्भवती महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज हो सकती है।
3. अधिक तनाव से गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास रुक सकता है।
4. तनाव के कारण गर्भवती महिलाओं में नींद की कमी की समस्या हो जाती है।
5. माँ की नींद में कमी के कारण बच्चे का ब्लड सर्कुलेशन खराब हो जाता है।
6. इसके कारण बच्चे के लंग्स का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है।
7. इसके कारण कई बार प्रीमेच्योर डिलीवरी का जोखिम भी बना रहता है।
8. इससे बच्चे में सांस से जुड़ी दिक्कतों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
प्रीमेच्योर डिलीवरी के नुकसान क्या हो सकते हैं?
प्रीमेच्योर डिलीवरी के नुकसानों में निम्नलिखित कारक शामिल हो सकते हैं, जैसे कि
1. इस तरह की स्थिति में विशेष तौर पर बच्चों में आयरन की कमी देखी जाती है।
2. बच्चे में पाचन से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी काफी ज्यादा रहता है।
3. माँ के लिए इस तरह की स्थिति काफी ज्यादा तनावपूर्ण हो सकती है।
4. जन्म के दौरान बच्चे का वजन काफी कम हो सकता है।
5. इस दौरान माँ को मधुमेह जैसी समस्या होने का खतरा काफी ज्यादा रहता है।
6. इस तरह की स्थिति में ज्यादातर महिलाओं को पोस्टपार्टम डिप्रेशन होने की संभावना काफी ज्यादा होती है।
7. बच्चे को सांस से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता सकता है।
8. बच्चे में संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
जेंडर पता लगाने में हो सकती है दिक्कत
दरअसल, आपको बता दें, कि गर्भ में पल रहे लड़के और लड़कियों का शारीरिक विकास बहुत ही अलग तरीके से होता है। गर्भावस्था के दौरान अगर महिला ज्यादातर तनाव में ही रहती है, तो इससे गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास बुरी तरीके से प्रभावित हो सकता है। दरअसल, इस तरह की स्थिति के दौरान बहुत बार बच्चे का जेंडर पता लगाने पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। आम तौर पर, इस दौरान शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन की वजह से दरअसल, माँ और बच्चे के शरीर को जोड़ने वाले प्लेसेंटा के काम करने के तरीके पर भी असर पड़ता हैं।
निष्कर्ष : हां, यह बात बिल्कुल सच है, कि गर्भावस्था के दौरान तनाव के कारण गर्भवती महिअलों में प्रीमेच्योर डिलीवरी का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है। तनाव न केवल माँ के लिए, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी काफी ज्यादा हानिकारक साबित हो सकता है। इसकी वजह से गर्भवती महिलाओं का ब्लड प्रेशर हाई होने के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे में आयरन की कमी और शारीरिक सेहत भी बुरी तरीके से प्रभावित हो जाती है। तनाव के कारण गर्भवती महिलाओं को कई दिक्क़ते हो सकती हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही सुमीता सोफत अस्पताल में इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी ले सकते हैं।