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क्या स्लिप्ड डिस्क की समस्या IVF प्रक्रिया को बाधित कर सकती है? जाने IVF विशेषज्ञों से।

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आज के समय में आम तौर पर कई लोग हर दिन स्लिप डिस्क के दर्द से जूझ रहे हैं। स्लिप डिस्क, जिसको हर्नियेटेड या प्रोलैप्स्ड डिस्क के नाम से भी जाना जाता है। स्लिप डिस्क की समस्या एक आम समस्या है जो हर वर्ग के लोगों को प्रभावित करती है। ये समस्या तब होती है, जब आपकी रीढ़ की हड्डियों के बीच की एक डिस्क ख़राब हो जाती है और ये आस-पास की नसों के ऊपर दबाव डालती है। इसलिए स्लिप डिस्क की समस्या IVF प्रक्रिया को बाधित कर सकती है, क्योंकि इस समस्या से दर्द, सुन्नता और कमजोरी हो सकती है, खासकर आपकी पीठ, गर्दन या पैरों में। जो IVF के लिए सही साबित नहीं होती है। ये पुरे तरिके से IVF को बिगाड़ देती है इसलिए IVF से पहले स्लिप डिस्क का इलाज करवाना बहुत जरूरी होता है। इसके द्वारा होने वाला दर्द IVF को प्रभावित कर सकता है। 

आईवीएफ प्रक्रिया क्या है? 

आईवीएफ एक सफ़ल प्रजनन उपचार और एक चिकित्सा प्रक्रिया है। IVF प्रक्रिया उन जोड़ों के लिए त्यार की गई है जिनके प्राकृतिक रूप से बच्चा नहीं हो पाता है और IVF उन जोड़ों को माँ बाप बनने का सुख प्रदान करती है। IVF प्रक्रिया में निषेचन शरीर के बाहर होता है। यह जिन लोगों को प्रजनन संबंधी कई तरह की समस्याएं होती हैं ये उनके लिए उपयुक्त और कई लोगों के लिए उपलब्ध सबसे आम और सफ़ल उपचारों में से एक है। 

स्लिप्ड डिस्क या डिस्क प्रोलेप्स की समस्या क्या है ?

व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी छोटी कई ईंट जैसी हड्डियों से बनी होती है जिसको वर्टिब्रा भी कहा जाता है। जोकि एक दूसरे के ऊपर रखी होती हैं। प्रत्येक हड्डियों के बीच में नरम, कुशन जैसी डिस्क होती हैं जो की शॉक एब्जॉर्बर का काम करती हैं। इस डिस्क में एक मजबूत रेशेदार बाहरी भाग होता है जिसे एनलस फाइब्रोसिस कहा जाता है और एक नरम जेली जैसा मध्य भाग होता है, जिस को न्यूक्लियस पल्पोसस कहा जाता है।

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दरअसल स्लिप्ड डिस्क की समस्या होने पर डिस्क वास्तव में खिसकती नहीं है। व्यक्ति की डिस्क की बाहरी परत में कमज़ोरी का कारण न्यूक्लियस पल्पोसस जिसको डिस्क का अंदरूनी, नरम हिस्सा कहा जाता है(वह जेल जैसा हिस्सा) बाहर की तरफ़ निकल आता है। जिसको डिस्क की समस्या कहते हैं। 

स्लिप्ड डिस्क को डिस्क प्रोलैप्स/डिस्क हर्नियेशन भी कहते हैं। बाहर की और निकली हुई डिस्क रीढ़ की हड्डी से आने वाली नस जड़ों पर दबाव डाल सकती है। और डिस्क के प्रोलैप्स वाले हिस्से के आसपास कुछ सूजन भी हो सकती है। और यह सूजन नसों की जड़ों को नुक्सान पहुंचा सकती हैं और सूजन को पैदा करती हैं जिसकी वजह से नसों पर बुरी तरिके से दबाव बढ़ जाता है। 

डिस्क प्रोलेप्स की समस्या आपकी रीढ़ की हड्डी में कहीं पर भी हो सकता है। हालांकि इस को सबसे ज्यादा पीठ के निचले हिस्से की डिस्क में देखा जाता है जिसको (काठ का रीढ़) कहा जाता है। और इसके बाद इसको गर्दन, और वक्षीय रीढ़ में शायद ही कभी पाया जाता है। पीठ का निचला हिस्सा L4-L5 और L5-S1 स्तर बहुत ज्यादा प्रभावित होता है,

रीढ़ की हड्डी में दिमाग से आने वाली नसें होती हैं, जो की बिलकुल सुरक्षित होती हैं। रीढ़ की हड्डी से नसें कशेरुकाओं के बीच से निकलती है, और शरीर के अलग-अलग हिस्सों से संदेश ले जाती हैं। और जब डिस्क प्रोलैप्स हो जाती है, तो डिस्क का अंदरूनी नरम हिस्सा बाहर निकल आता है, और जब ऐसा होता है, तो डिस्क रीढ़ की हड्डी नसों पर दबाव डाल सकती है, जिसके कारण पीठ, गर्दन, हाथ और पैरों में दर्द महसूस हो सकता है।

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स्लिप्ड डिस्क किसको होता है? और IVF पर इसका असर 

स्लिप्ड डिस्क के विकसित होने की सबसे आम उम्र 30 से 50 वर्ष के बीच में मानी जाती है। और आपको बता दें की लोगों की बदलती जीवनशैली के कारण और आज के समय में अपने काम को अहमियत देने वाले पुरुष और महिलाएं देर से शादी करते हैं लगभग 30 वर्ष की उम्र में जाकर पुरुष शादी करते हैं, जिसकी वज़ह से कई बार वह प्रकृतिक रूप से वह कंसीव नहीं कर पाते हैं। और ज़्यादा उम्र के चलते कई बार, पुरुष और महिलाओं को स्लिप्ड डिस्क की समस्या का सामना करना पड़ता है। जब वह प्राकृतिक रूप से बच्चा नहीं पैदा कर पाते हैं तो वह IVF प्रक्रिया का सहारा लेने के लिए जाते हैं, तो ऐसे में फिर स्लिप्ड डिस्क की समस्या IVF प्रक्रिया को बाधित कर सकती है। 

स्लिप्ड डिस्क होने के लक्षण

  • बहुत ज़्यादा पीठ दर्द होना 
  • नसों की जड़ों  में दर्द होना 
  • हाथ और पैर में सुन्नपन या झुनझुनी
  • मांसपेशियों में कमजोरी होना 
  • दर्द जो हिलने डुलने से बढ़ जाता है

स्लिप डिस्क का क्या कारण है?

  • उम्र बढ़ना : जैसे-जैसे  व्यक्ति की उम्र बढ़ती जाती है, वैसे ही उसकी रीढ़ की हड्डी की डिस्क में पानी की मात्रा कम होती जाती है और वह कम लचीली हो जाती है।
  • चोट होना : अगर व्यक्ति अचानक से भारी सामान उठाये और गिरने या फिर किसी दुर्घटना से डिस्क ख़राब हो सकती है।
  • अति प्रयोग: काम वाली जगह पर बार-बार तनाव या गलत आसन के कारण समय के साथ डिस्क में खराबी हो सकती है।
  • जेनेटिक्स: ये समस्या जेनेटिक्स भी हो सकती है जैसे कि कुछ लोगों के परिवार में स्लिप डिस्क संबंधी समस्याओं का इतिहास हो सकता है।
  • ज़्यादा वजन: व्यक्ति का अधिक वजन भी रीढ़ की हड्डी पर ज़्यादा दबाव डालता है। 
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निष्कर्ष :

स्लिप्ड डिस्क की समस्या आम तोर पर 30 से 50 वर्ष के बीच लोगों में विकसित होती है। और आज के समय में पुरुष और महिलाएँ आम तोर पर इसी उम्र के आस पास शादी करते हैं अपने काम के चलते वह अपनी उम्र पर भी ध्यान नहीं देते हैं और बढ़ती उम्र के कारण कई लोग स्लिप्ड डिस्क की समस्या का शिकार हो जाते हैं। जोड़ों के देर से शादी करने से कई बार प्रकिर्तिक रूप से वह कंसीव नहीं कर पाते हैं, एकमात्र IVF का सहारा उनके पास होता है और स्लिप्ड डिस्क की समस्या से पीड़ित होने की वजह से IVF प्रकिरिया बाधित हो जाती है। जिसकी वजह से उनको निराश होना पड़ता है स्लिप्ड डिस्क का इलाज करवाने के बाद ही लोगों को IVF प्रक्रिया करवानी चाहिए। अगर आप भी स्लिप्ड डिस्क जैसी समस्या से जूझ रहें हैं और IVF प्रक्रिया करवाना चाहते हैं इसके बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप आज ही सुमिता सोफत अस्पताल जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और IVF विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी ले सकते हैं।

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