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IVF ट्रीटमेंट के दौरान मानसिक थकावट और दिमागी कमजोरी से कैसे पाएं राहत। जाने डॉक्टर से

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IVF उपचार के दौरान मानसिक थकान और दिमागी कमजोरी एक आम कारण है, पर IVF में खुशी की बात ये है की मानसिक थकावट और दिमागी कमजोरी अस्थायी होती है। IVF प्रकिरिया को सफ़ल बनाने के लिए इसके सभी चरणों को देखरेख करनी बहुत ज्यादा जरूरी होती है। IVF में प्रजनन दवाओं का इस्तेमाल जो महिला के चक्र को नियंत्रित करने के लिए हार्मोन के स्तर को बदलते हैं। 

आईवीएफ के दौरान मानसिक थकावट का कारण 

आम तौर पर IVF में थकान होना एक आम बात है और थकान के होने का आम कारण महिलाओं और पुरुषों के हार्मोन स्तर में बदलाव होना है। मुख्या रूप से ज़्यादातर थकान प्रोजेस्टेरोन के स्तर के बढ़ने से होती है। शरीर ज़्यादा प्रोजेस्टेरोन को पैदा करता है ताकी यह एक सेहतमंद भ्रूण की परत को बना सके और इसको कायम रख सके। 

मानसिक थकावट क्या होती है?

आम तौर पर जब आपका शरीर थक जाता है तो उसको शारीरिक थकान के रूप में जाना जाता है। मानसिक थकावट की समस्या तब बनती है जब आप किसी काम को लम्बे समय से कर रहे हैं, और उसमें अपना ज़्यादा दिमाग लगा रहे है और इसके कारण उस काम में ज्यादा ध्यान केन्द्रित करने की आवयश्कता होती है। इसलिए जब आप मानसिक थकान का सामना करते हैं तो आप दिमागी रूप से थक जाते हैं पर शरीर स्वस्थ रहता है। अगर हम माने तो मानसिक थकावट तब हो सकती है जब आपका दिमाग बहुत अधिक उत्तेजना प्राप्त करता है या फिर बिना किसी आराम के तीव्र स्तर की गतिविधि को बनाए रखना होता है, जैसे समस्याओं का हल करना, घर की चिंता, अपने करियर की चिंता, कला के क्षेत्र में कोई काम, कोई भी नीतिगत कार्य करने का भार, भारी अध्ययन का कार्य और उसमें अपनी मानसिक स्थितियों को कंट्रोल करना  जैसी अन्य समस्याएं। पहले मानसिक थकावट वयस्कों में देखी जाती थी पर अब ये बच्चों में भी देखने को मिल रही है, इसका कारण बढ़ती प्रतिस्पर्धा। 

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IVF के दौरान थकान के कारण?

IVF उपचार के दौरान हार्मोन के स्तर में बदलाव होना ये थकान का सबसे आम कारण होता है। जब कोई महिला गर्भवती होती है, तो प्रोजेस्टेरोन कुदरती रूप से अपने आप बढ़ता है और गर्भावस्था के दौरान शरीर ज्यादा प्रोजेस्टेरोन का उत्पाद करता है ताकि वह एक स्वस्थ भ्रूण की परत को बना सके और उसको लगातार बनाये रखे। 

IVF प्रक्रिया के दौरान महिला को कई तरह की प्रजनन दवाओं को दिया जाता है। इस दौरान ये दवाएं महिला के शरीर को गर्भावस्था के लिए तैयार करने के लिए प्रोजेस्टेरोन के साथ-साथ कुछ हार्मोन के स्तर में बढ़ावा कर देती हैं। इस लिए जिस तरह एक महिला की गर्भावस्था के दौरान प्रोजेस्टेरोन का स्तर प्राकृतिक रूप से अपने आप बढ़ जाता है ऐसे ही IVF प्रक्रिया के दौरान प्रोजेस्टेरोन का स्तर खुद-ब-खुद बढ़ जाता है। इस लिए IVF के दौरान थकान होना एक आम कारण है जिसमें हार्मोन्स का स्तर बदलता है। IVF में तनाव और चिंता से स्थिति और भी ज़्यादा बिगड़ सकती है। कई बार कई जोड़ों की IVF की प्रकिरिया असफल हो जाती है और बार बार असफल गर्भधारण के कारण चिंता और उम्मीद शारीरिक और मानसिक दोनों तरिके से महिला को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए कई मरीज IVF प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही अपने आप को थका हुआ महसूस करते हैं। IVF के दौरान थकान महसूस करना एक आम बात है। 

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दिमागी कमजोरी क्या होती है? 

व्यक्ति के दिमाग को सही ढंग से काम करने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है। व्यक्ति के दिमाग में कमजोरी तब होती है जब दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीजन या अन्य पोषक तत्वों की पूरी मात्रा नहीं मिल पाती है, इससे व्यक्ति के दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। जो दिमाग की कमजोरी की समस्या बन कर सामने आती है। अगर दिमाग के प्रमुख हिस्से में खून पहुंचाने वाली कोशिका में थक्का जम जाए तो आपको दिमागी कमजोरी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। 

जब किसी को दिमाग के दौरे की समस्या पड़ती है तो एक मिनट के अंदर सभी प्रभावित कोशिकाएं अपना दम तोड़ देती है। आज कल दिमाग की कमजोरी सभी वर्ग के लोगों में देखी जा सकती है। 

दिमागी कमजोरी के कारण?

  • धूम्रपान या तंबाकू की आदत होना। 
  • मधुमेह, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज जैसी समस्या का होना। 
  • व्यायाम न करना। 
  • ज्यादा घी, तेल और चर्बीयुक्त पदार्थ का अधिक सेवन करना। 
  • ज्यादा शराब पीना। 
  • आनुवंशिकता और तनाव होना। 

मानसिक थकान से कैसे राहत पाएं 

IVF प्रक्रिया के दौरान थकान होना एक एक आम बात है, और इसके दौरान थकान कई बार बहुत ज्यादा भी हो सकती है। लेकिन कई महिलाएं बिना किसी परेशानी के अपनी नियमित दिनचर्या का पालन जारी रखती हैं। महिलाओं को ये चाहिए की वह अपने शरीर की सुने और ज़रूरत के हिसाब से ही बदलाव करें जैसे की, 

  • पर्याप्त नींद को लें।
  • आवश्यकता के अनुसार झपकी लें।
  • पर्याप्त पानी को पिएं और पौष्टिक आहार लें। 
  • किसी भी काम में जैसे घर का काम, दैनिक और अन्य कार्यों में मदद मांगने से पीछे न हटें। 
  • अपने आप को महसूस करवाएं की ये समस्या अस्थायी है और ये जल्द ही खत्म हो जाएगी। 
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दिमागी कमजोरी को दूर करने के लिए क्या खाएं ?

  • ज्यादा मात्रा में फूड्स को लें। 
  • घी, जैतून का तेल, अखरोट, भीगे हुए बादाम, किशमिश, खजूर और ताजे फलों का सेवन करें। 
  • इसके अलावा दालें, बीन्स, पनीर और मटर आदि हरी सब्जियों का सेवन करें 

यह प्राकृतिक रूप से दिमाग की शक्ति को बढ़ाने में मदद करते हैं और दिमाग को तेज करते हैं। 

दिमागी कमजोरी से कैसे राहत पाएं?

इस तरीके की समस्या से राहत पाने के लिए और मांसपेशियों में होने वाले खिंचाव को कम करने के लिए और उनको ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए आप अपनी दिनचर्या में बदलाव कर सकते हैं जैसे, 

  • रोजाना एक्सरसाइज करें। 
  • डॉक्टर से प्राप्त उपचार लें। 
  • चीनी व नमक का उपयोग कम करें। 
  • पौष्टिक चीजों का सेवन ज़्यादा करें। 
  • ख़राब खाने से दूरी बनाएं। 

निष्कर्ष :

IVF प्रक्रिया के दौरान महिला को मानसिक थकावट और दिमागी कमजोरी होना एक आम बात है। मानसिक थकावट और दिमागी कमजोरी IVF के बार बार फेल होने की वजह से ऐसा हो सकता है। लेकिन ये अस्थाई होता है। अपनी जीवनशैली में बदलाव करके मानसिक थकावट और दिमागी कमजोरी को दूर किया जा सकता है। अगर आप भी IVF में होने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं और IVF ट्रीटमेंट करवाना चाहते हैं तो आप आज ही सुमिता सोफत अस्पताल जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं, और IVF विशेषज्ञों से इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

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