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क्या हर फाइब्रॉइड बनता है इनफर्टिलिटी का कारण? डॉक्टर से जानें, इसके बारे में!

Female sterilization model showing reproductive system for permanent contraception.

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गर्भाशय में फाइब्रॉएड की मौजूदगी यह बिल्कुल भी नहीं दर्शाती है, कि एक महिला को गर्भधारण करने में किसी भी तरह की कोई दिक्कत या फिर कोई रुकावट पैदा होगी। फाइब्रॉयड्स होने के बावजूद भी कई महिलाएं, बिना किसी इलाज और रुकावट के प्राकृतिक रूप से माँ बनती हैं। हालांकि, फाइब्रॉइड की बात आते ही बहुत सी महिलाएं डर जाती हैं और तनाव लेने लग जाती हैं, पर आपको बता दें, कि फाइब्रॉइड्स एक आम समस्या है, जिससे घबराने की कोई भी जरूरत नहीं होती है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों में बनने वाली एक गैर-कैंसरयुक्त गांठ की तरह होती है, जिसको मायोमा या फिर रसौली के नाम से भी जाना जाता है। 

कई अफवाहों की वजह से महिलाओं को लगता है, कि गर्भाशय में फाइब्रॉयड्स होना मतलब कि अब गर्भधारण नहीं हो पाएगा, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है। डॉक्टर के अनुसार, गर्भाशय में मौजूद हर फाइब्रॉइड इनफर्टिलिटी का कारण नहीं बनता है। हालांकि, कुछ फाइब्रॉइड्स गर्भधारण में समस्या पैदा कर सकते हैं, पर सभी फाइब्रॉइड्स ऐसा नहीं करते हैं। फाइब्रॉएड का प्रभाव उसके आकार और स्थान पर निर्भर करता है। चलिए आगे जानते हैं। 

गर्भाशय में फाइब्रॉएड के कितने प्रकार होते हैं? 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि एक महिला के गर्भाशय में फाइब्रॉएड उनकी जगह के मुताबिक 3 प्रकार के होते हैं, जो निम्नलिखित अनुसार हैं:

1. सबसीरस फाइब्रॉइड

यह फाइब्रॉएड एक महिला के गर्भाशय की बाहरी दीवार पर मौजूद होते हैं। 

2. सबम्यूकोसल फायब्रॉइड

दरअसल, यह फाइब्रॉएड महिला की गर्भाशय के अंदर की गुहा में मौजूद होते हैं। 

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3. इंट्राम्यूरल फाइब्रॉएड

हालांकि, यह फाइब्रॉएड एक महिला के गर्भाशय की मांसपेशियों के अंदर मौजूद होते हैं। 

यह जानना बहुत जरूरी है कि हर महिला जिसे फाइब्रॉइड है, उसे गर्भधारण की समस्या हो यह जरूरी नहीं है।

सभी फाइब्रॉइड्स बांझपन का कारण क्यों नहीं बनते हैं?

आम तौर पर, सभी फाइब्रॉइड्स बांझपन का कारण क्यों नहीं बनते हैं, इसकी वजह निम्नलिखित अनुसार हो सकती है, जैसे कि 

1. गर्भाशय में फाइब्रॉएड की जगह बहुत मायने रखती है!

हालांकि, आपको इसके बारे में बता दें, कि जो फाइब्रॉइड एक महिला के गर्भाशय की बाहरी सतह पर मौजूद होते हैं, असल में वह गर्भधारण में होने वाली किसी भी तरह की परेशानी का कारण नहीं बनते हैं। इसके अलावा, यह फाइब्रॉइड न तो अंडे के ठहरने में किसी भी तरह की कोई परेशानी खड़ी करते हैं और न ही शुक्राणुओं की गति को रोकने में कोई बाधा डालते हैं। इसलिए, इस दौरान अगर आपको गर्भाशय में फाइब्रॉएड जैसी स्थिति का पता चलता है, तो आपको इस दौरान घबराने की कोई जरूरत नही होती है, ऐसे में भी आपका गर्भधारण संभव हो सकता है .

2. गर्भाशय में फाइब्रॉएड का आकार भी काफी महत्वपूर्ण होता है!

इस तरह की स्थिति में, गर्भाशय में मौजूद फाइब्रॉइड्स का आकर भी काफी ज्यादा मायने रखता है। क्योंकि, ऐसे में छोटे फाइब्रॉइड्स अक्सर किसी भी तरह का कोई लक्षण प्रदान नहीं करते हैं और न ही वह गर्भावस्था के दौरान किसी भी रुकावट का कारण बनते हैं। इस तरह की स्थिति में, बहुत सी महिलाओं को तो पता भी नहीं होता है, कि उन के गर्भाशय में कोई फाइब्रॉइड भी है। आम तौर पर, जब किसी जांच या फिर किसी अल्ट्रासाउंड के माध्यम से इसके बारे में जानकारी हासिल न हो या फिर इसके बारे में पता न चले और इसके साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं होता है। इसलिए, किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले जांच और सलाह जरूरी होती है। 

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3. गर्भाशय में फाइब्रॉएड होने के बावजूद भी महिलाएं माँ बन सकती हैं!

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गर्भाशय में फाइब्रॉयड्स होने के बावजूद भी कई महिलाएं माँ बनने का सुख प्राप्त कर सकती हैं। और तो और यह बिना किसी इलाज के एक सेहतमंद बच्चे को जन्म दे सकती हैं। ऐसा वाकई संभव होता है। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में कई बार फाइब्रॉएड का पता गर्भावस्था के दौरान की गयी जांच के दौरान चलता है। 

4. ऐसे में हर बार इलाज जरूरी नहीं होता है!

दरअसल, अगर आपको गर्भाशय में मौजूद फाइब्रॉइड से किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं हो रही है, जैसे ज्यादा दर्द होना, काफी ज्यादा खून बहना और गर्भधारण में भी कोई समस्या नहीं आ रही है, तो ऐसे में डॉक्टर आपको सर्जरी की तो बिल्कुल भी सलाह नहीं देते हैं। इस तरह की स्थिति में, केवल आपको नियमित जांच और गंभीर निगरानी की जरूरत होती है। 

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निष्कर्ष: 

कुल मिलाकर, गर्भाशय में फाइब्रॉयड्स होने का असल मतलब यह नहीं होता है, कि वह महिला अब कभी भी माँ नहीं बन पाएगी। पर, फिर भी कई महिलाएं यह सोच कर घबरा जाती हैं और तनाव लेने लग जाती हैं। दरअसल, उन को ऐसा लगता है, कि अगर उन के गर्भाशय में फाइब्रॉएड यानी कि अगर उनकी बच्चे दानी में गांठ होगी, तो वह इसके कारण कभी माँ नहीं बन पाएगी। तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। हर फाइब्रॉइड इनफर्टिलिटी का कारण नहीं बनता है। ज्यादातर महिलाएं गर्भाशय में फाइब्रॉयड्स होने के बावजूद भी बिना किसी परेशानी और इलाज के माँ बनने का सुख प्राप्त कर सकती हैं और एक सेहतमंद बच्चे को जन्म दे सकती हैं। विशेष तौर पर, बांझपन का खतरा गर्भाशय में फाइब्रॉएड के स्थान, आकार और प्रकार पर निर्भर करता है, न केवल उन वहां होने पर। अल्ट्रासाउंड, पेल्विक जांच, हिस्टेरोस्कोपी और एमआरआय से फाइब्रॉइड्स की पहचान की जा सकती है। इसलिए, इस तरह की स्थिति होने पर बिल्कुल भी न घबराएं सही जानकारी प्राप्त करने के लिए अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। आपको इसके बारे में सही जानकारी प्राप्त होना अधिक महत्वपूर्ण है, ताकि आप बिना किसी डर के सही फैसला ले सकें। तो इसके बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए और गर्भावस्था से जुड़े किसी भी सवाल या फिर किसी भी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही सुमिता सोफत अस्पताल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इस के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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