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IVF में हार्मोनल इंजेक्शन के बाद क्यों होती है कब्ज समस्या? जाने IVF विशेषज्ञों से।

What is the problem of constipation after hormonal injection in IVF? Know from IVF experts.

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IVF एक बेहतरीन तरीका है जो, पुरुषों और महिलाओं के बांझपन को दूर करता है और IVF अभी तक की सफ़ल  तकनीक है। आज कल के जोड़े कुदरती रूप से गर्भ धारण नहीं कर पाते हैं उनके लिए IVF एक वरदान सवरूप है। आज ते समय में महिलाएं अपने काम को ज़्यादा अहमियत देती हैं और देर से शादी करती हैं जिससे की कुदरती रूप से संकीव करने में  काफी दिक्क्तें आती हैं इस लिए देश में IVF प्रकिरिया को अपनाने वाले लोग और लोगों की सखिया तेजी से बढ़ रही है। IVF से महिला और पुरुष अपना बच्चा पाने का सपना पूरा कर सकते हैं जो कि IVF एक मेडिकल प्रक्रिया है। इस IVF की प्रक्रिया में महिला और पुरुष दोनों शामिल होते हैं और इसमें महिला के अंडों को पुरुष के स्पर्म के साथ लैब में निषेचित करकर महिला की गर्भाशय में स्थानांतरण किया जाता है। हालांकि IVF में महिला के अंडों को बनाने के लिए कुछ जरूरी हार्मोनल इंजेक्शन का उपयोग किया जाता है और ये  इंजेक्शन महिला के शरीर में काफी बदलाव ला सकते हैं जैसे की इस दौरान महिला को कब्ज होना एक आम समस्या होती है और ये समस्या महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा प्रभावित करती हैं, और ये समस्या असुविधाजनक होती है। 

आईवीएफ की प्रक्रिया को समझना 

आम तोर पर IVF प्रक्रिया के कई चरण होते हैं, और ये कई चरणों के बाद समाप्त होती है। IVF प्रक्रिया में महिला और पुरुष दोनों शामिल होते हैं, और इसके दौरान महिला और पुरुष की मौजूदा स्वास्थ्य और प्रजनन स्वास्थ्य को समझने के लिए उनके कई तरह के टेस्ट किये जाते हैं, और महिला के अंडों को निकालने और और उनको बनाने के लिए महिला को कई तरह के हार्मोनल इंजेक्शन भी दिए जाते हैं। यह हार्मोनल इंजेक्शन ओवरी को उत्तेजित करते हैं, जिससे कि वह अधिक अण्डों को बनाते हैं। और इसके बाद महिला के अंडों को पुरुष के स्पर्म के साथ लैब में निषेचित करके महिला की गर्भाशय में स्थानांतरण किया जाता है। ये जटिल प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया में हर चरण का सफल होना बहुत ही जरूरी होता है, क्योंकि तभी महिला अच्छे से संकीव कर पाती है।  

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IVF में हार्मोनल इंजेक्शन लगाना क्यों है जरूरी ?

IVF की प्रकिरिया में हार्मोनल इंजेक्शन लगाना बहुत जरूरी होता है क्योकि इसके उपयोग से ही अंडाशय को स्टिम्यूलेट करने और अण्डों की गुणवत्ता को बढ़ाया जाता है। एग्स की क्वालिटी बढ़ाने के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है। आम तोर पर इन इंजेक्शन में FSH (फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन) और HCG (ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन) जैसे हार्मोन होते हैं। इस प्रकिरिया दौरान आखिर इंजेक्शन क्यों दिए जाते हैं 

  • अण्डों की मैच्योरिटी को बढ़ाने के लिए 
  • ओवरी को सक्रिय करने के लिए 
  • गर्भधारण के लिए गर्भाशय की परत को तैयार करने के लिए। 

इसके विशषेज्ञों का कहना है की कुछ मामलों में हार्मोनल इंजेक्शन से महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव और कब्ज की समस्या होना भी शामिल है जिससे महिलाओं को असहजता होती है और महिला मानसिक दबाव महसूस करती है जिससे कि वह काम में फोकस नहीं कर पाती हैं।

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IVF प्रक्रिया के दौरान कब्ज के कारण

  • तनाव और चिंता : ये प्रक्रिया महिला को भावनात्मक रूप से थका देती है और इसमें चिंता और तनाव का होना एक आम लक्षण माना जाता है। तनाव  महिला  पाचन तंत्र को खराब कर सकता है जिससे कब्ज हो सकती है।
  • हार्मोनल बदलाव : IVF प्रक्रिया दौरान महिला के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं  जिसमें की हार्मोन इंजेक्शन लगाने के बाद प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ सकता है। ये आंतों की मांसपेशियों को धीमा कर सकता है और पाचन शक्ति को धीमा कर, कब्ज का कारण बनता है। 
  • शारीरिक गतिविधि कम होना : IVF प्रक्रिया के बाद महिला के शरीर को ठीक होने के लिए समय की जरूरत होती है और डॉक्टरों द्वारा उनको ज्यादा आराम करने की लाह दी जाती है। इसके कारण उनकी  शारीरिक गतिविधि में कमी हो जाती है जिससे की कब्ज की समस्या होती है। 
  • हार्मोनल दवाएं : IVF प्रक्रिया के दौरान उपयोग की जाने वाली हार्मोनल दवाएं जैसे की प्रोजेस्टेरोन सप्लीमेंटस ये दवाइयां कभी-कभी पाचन क्रिया को धीमा करती है, जिससे की कब्ज हो सकता है।
  • पानी कम पीना : IVF दौरान अगर महिलाएं पर्याप्त मात्रा में पानी ना पियें तो शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है जो पाचन शक्ति को प्रभावित करता है और कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। महिलाओं को कब्ज से बचने के लिए पानी का सेवन ज्यादा मात्रा में रखना सबसे आसान तरीकों में से एक माना जाता है। 

आईवीएफ में कब्ज से बचाव के उपाय

1. IVF के दौरान संतुलित और फाइबर युक्त आहार महिलाओं को खाने चाहिए इसकी सलाह डॉक्टरों द्वारा दी जाती है जो महिलाओं का बाउल मूवमेंट बेहतर और कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाते हैं। अलसी के बीज, सेब, नाशपाती, पपीता, पालक, गाजर, ब्रोकली, साबुत अनाज, और चिया सीड्स आदि महिलाओं को अपनी डाइट में शामिल करने चाहिए। 

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2. कब्ज जैसी समस्यायों से बचने के लिए महिलाओं को रोजाना  8 से 10 गिलास पानी के पिने चाहिए अधिक पानी से मल सोफ्ट और पेट साफ़ हो जाता है। 

3. IVF प्रक्रिया से पहले और प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं को हल्की शारीरिक गतिविधियों को करने की सलाह दी जाती है, एक्सरसाइज करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें 

4. कब्ज की समस्या का आम कारण तनाव और चिंता हैं तनाव और चिंता से बचने के लिए योग और मेडिटेशन जेस्सी प्रक्रिया को आप अपनी लाइफ में शामिल कर सकते हैं इससे आपको आराम और कब्ज धीरे-धीरे कम हो जाती है। 

निष्कर्ष :

IVF के दौरान हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते है महिला के अण्डों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए।  और इसके दौरान महिला को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसमें से कब्ज होना एक आम समस्या मानी जाती है और अपनी जीवनशैली में बदलाव कर्क वह बी इस  छुटकारा पा सकती है। अगर आप भी IVF के विकल्प को चुनना चाहते हैं इसके बारे में जानकारी लेना चाहते हैं तो आप सुमिता सोफट अस्पताल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और IVF के विशेषज्ञों से सलाह और जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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