आज के लेख में हम बात करेंगे कि कैसे आईवीएफ उपचार को करवाते समय हमे किन बातो का खास ध्यान रखना है ताकि बाद में चलकर हमे किसी भी तरह की परेशानी का सामना न कर...
आज के लेख में हम बात करेंगे कि कैसे आईवीएफ उपचार को करवाते समय हमे किन बातो का खास ध्यान रखना है ताकि बाद में चलकर हमे किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। और साथ ही ये भी बात करेंगे कि आईवीएफ उपचार है क्या।
क्या है आईवीएफ उपचार ?
आईवीएफ महिलाओं से जुड़ा हुआ एक उपचार। इसके बारे में विस्तार से हम निम्न में बात करेंगे ;- आईवीएफ एक फर्टिलिटी उपचार है, जिसमें अंडों को शुक्राणु/स्पर्म के साथ अप्राकृतिक तरीके से मिलाया जाता है।
- यह प्रक्रिया मेडिकल लैब में नियंत्रित परिस्थितियों में की जाती है। यह प्रक्रिया इंफर्टिल दम्पति, और उन लोगों के लिए सहायक है, जिनको कोई जननिक दिक़्क़त या परेशानी है।
आईवीएफ उपचार के बाद हमे किन सावधानियों का रखना है विशेष ध्यान ?
आईवीएफ उपचार के दौरान निम्न सावधानियों का ध्यान रख के आप खुद को अत्यधिक पीड़ा से बचा सकते हो ;- दवाइयां समय पर लें, आईवीएफ गर्भावस्था के प्रारंभिक तीन महीनों तक डॉक्टर महिला को प्रोजेस्टेरोन समेत कई अन्य दवाइयां देते हैं।
- सामान्य एक्सरसाइज को जरूर से अपनाए, क्युकि ऐसा करने से आपका शरीर सुचारु रूप से कार्य करने में समर्थ रहता है।
- सामान्य दिनचर्या का जरूर से पालन करें।
- बैलेंस डाइट लें, ताकि आपका पूरे दिन का कार्य करने का बैलेंस बना रहे।
- कैफीन, शराब और ड्रग्स का सेवन न करे, क्युकि जो महिलाएं इन चीजों का इस्तेमाल करती है उनमे मिसकैरेज की समस्या उत्पन हो सकती है।
- चिंता से दूरी बनाएं, क्युकि चिंता चिता के सामान होती है।
- स्वस्थ वजन बनाएं और खान-पान पर खास ध्यान रखे।
- क्टर से जांच समय- समय पर करवाते रहे।
- संभोग करने से बचे। क्युकि ऐसी अवस्था में संभोग करना आपको वैजाइनल इन्फेक्शन की तरफ लेकर जाने का पहला कदम है। ऐसा करने से आपका गर्भपात भी हो सकता है।
- भारी सामान बिल्कुल भी न उठाएं।
- आईवीएफ उपचार के बाद महिलाओं को अत्यधिक गर्म व ठंडे पानी से नहीं नहाना चाहिए। और न ही स्विमिंग करना चाहिए।
आईवीएफ उपचार के दौरान हमे डॉक्टर से कब बात करनी चाहिए ?
आईवीएफ उपचार के दौरान हमे डॉक्टर से तब बात करनी चाहिए, जब हममे निम्न परेशानियां उत्पन हो, जैसे ;- भारी मात्रा में ब्लीडिंग का होना।
- देखने में परेशानी का सामना करना।
- पेट में दर्द या ऐंठन की समस्या।
- पेशाब के दौरान जलन या कम पेशाब का आना।
- लगातार थकान और चक्कर का आना।
- लगातार सिर दर्द और चेहरे में सूजन का आना।
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Medically Reviewed & Authored By
Dr. Sumita Sofat
Gynecologist & Fertility Specialist
Dr. Sumita Sofat is a leading gynecologist and fertility specialist with over 28 years of experience in reproductive healthcare. She is the Managing Director of Dr. Sumita Sofat IVF Hospital, dedicated to providing advanced fertility treatments to couples.