बांझपन के लक्षण, कारण, इलाज, दवा, उपचार जानिए डाक्टर सुमिता सोफत से
Sofat Infertility & Women Care Centre India: डॉक्टर सुमिता सोफत, निसंतान होना कोई अभिशाप नहीं है आज के युग में जो दंपत्ति इस समस्या से जूझ रही है वे भी आधुनिक विधि यों के द्वारा संतान सुख की प्रापति कर सकती है। एक वैवाहिक जोड़े को लग भंग एक साल के आपसी सम्भोग के बाद संतान सुख की प्रापति हो जानी चाहिए। यदि उसको संतान सुख की प्रापति नहीं होती तो उसे डॉक्टरी सलाह ज़रूर ले लेनी चाहिए। देखा गया है क कई बार डॉक्टर सलाह पहले भी ले लेनी चाहिए जैसे कि एक कपल की शादी लेट हुयी है या वाइफ की उम्र ज़्यादा है या कोई वाइफ को महामारी में प्रॉब्लम है या हस्बैंड को कोई प्रॉब्लम आ रही है।
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महिलाओं में बांझपन के लक्षण, वीडियो हिंदी में देखिये
औरतों में बाँझपन की समस्या का प्रमुख कारण है ट्यूबों का बंद होना अंडा न बनना या फिर बच्चेदानी में नुक्स होना , रसोलियाँ होना या फिर बचे दानी का साइज छोटा होना।ट्यूबों बंद होने के कई कारण हो सकते हैं .
जैसे के ट्यूबों नलो की टुबरक्लोसिस के कारण बंद हो सकती हैं या जब लेडी को इन्फेक्शन होती है जिसको हम पेल्विक इन्फ्लैमटिक डिजीज कहते हैं उसके कारण भी ट्यूबों बंद हो सकती है, जब लेडी के रेपेटेड एबॉर्शन और रेपेटेड गर्भपात होता है तो उसके बाद भी इन्फेक्शन के कारण ट्यूबों बंद हो सकती हैं। अंडेदानी की जो समस्या है उसमें जो प्रमुख कारण है वो है क जब अंडा नहीं बनता या अंडा जब बनता है तब पूरी तरह से विकसित नहीं होता या फिर अण्डेदानिया ही फैल हो जाती हैं वो अंडा नहीं बना पाती। दूसरा' जो कारण है अंडेदानी का वो है अंडेदानी में रसोलियाँ होना , जो की खून की भी हो सकती है जिसको हम एन्ड्रोमेट्रोटिस्टिक बोलते हैं या फिर पानी की रसोलियाँ होना। बच्चेदानी का जो कारण है जिसके कारण एक लेडी को बचा नहीं ठहर सकता उसमें है फ़िब्रोस जिसको हम रसोलियाँ बोलते हैं दूर कारण है बचेदानी का जो साइज है छोटा है बचे दानी की तह जो है वो कमजोर है और बच्चे नहीं पकड़ सकती। फिर जो कारण हो सकता है बच्चे दानी के मुँह पे सोजज है इन्फेक्शन है सर्विकल रसोलियाँ भी बोलते हैं और इस इन्फेक्शन के कारण बच्चा नहीं ठहर सकता। जब भी एक निरसंतान जोड़ा हमारे पास आता है दोनों हस्बैंड वाइफ के टेस्ट किए जाते हैं। सबसे पहल जो आदमी के टेस्ट किये जाते हैं वो हैं सीमेन एनालिसिस इसमें देखा जाता है हस्बैंड के स्पर्म कितने हैं क्या स्पर्म फ़ंक्शन्सेस्ट किये जाते हैं जिसको कोई इन्फेक्शन तो नहीं जिसको हम सीमेन कल्चर करते हैं। यदि कोई सीमेन में प्रॉब्लम ए यानी क कोई स्पर्म कम है या बिलकुल भी नहीं है तो फिर एक आदमी के और भी टेस्ट किये जाते हैं देखा जाता है की स्पर्म क्यों ही बन रहे इसके एक आदमी के हॉरमोन एनालिसिस किये जाते हैं उसके बाद गोलियों की स्कैनिंग की जाती है और अंदर से भी पानी निकल के देखा जाता है स्पर्म अंदर बन रहे हैं या बिलकुल भी नहीं अंदर से भी स्पर्म बन रहे। और जाने की कोई ब्लाक है क नहीं है। एक लेडी के जो टेस्ट किये जाते हैं सबसे पहले बेस लाइन स्कैन किया जाता है जिसमें हम देखते हैं क उसकी बच्चेदानी ठीक है उसकी लाइनिंग ठीक है अंडेदानी की कोई समस्या तो नहीं है , फिर उसके बाद लेडी के होर्मोनेस टेस्ट किये जाते हैं जिनमें हमें जिनसे हमें पता लगता क उसकी अंडे बनने की क्षमता क्या है या उसको कोई थाइरोइड की प्रॉब्लम तो नहीं या और कोई हार्मोनल समस्या तो नहीं।फिर लेडी की ट्यूबों की जाँच की जाती है , जो ट्यूबों जाँच है वो तीन तरह से की जाती है।
- एक तो हम एक्सरे के ज़रिया क्र सकते हैं जिसको हम हिस्ट्रोसैपिंगोग्राफी कहते हैं।
- दूसरा जो है उसको हम अल्ट्रासाउंड के ज़रिये जिसको हम सोनोसानपिंगोग्राफी कहते हैं।
- तीसरा जो हम एक लेडी के पेट में दूरबीन डाल के किया जाता है।
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Medically Reviewed & Authored By
Dr. Sumita Sofat
Gynecologist & Fertility Specialist
Dr. Sumita Sofat is a leading gynecologist and fertility specialist with over 28 years of experience in reproductive healthcare. She is the Managing Director of Dr. Sumita Sofat IVF Hospital, dedicated to providing advanced fertility treatments to couples.